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Neeta Tayal
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Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए
"aadardiya समीर सर जी ,बधाई के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया, टंकण त्रुटियों को सुधारने की पूरी कोशिश करूंगी"
Sep 17, 2020
Samar kabeer commented on Neeta Tayal's blog post अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए
"मुहतरमा नीता तायल जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । टंकण त्रुटियों की तरफ़ जनाब हर्ष जी ने बता ही दिया है, मैं भी मोबाइल का ही प्रयोग करता हूँ मुझे तो ये परेशानी नहीं होती ।"
Sep 17, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Neeta Tayal's blog post वो बीता हुआ बचपन
"आ. नीता जी, अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 17, 2020
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए
"आदरणीय सर, मैं मोबाइल से टाइपिंग करती हूं HT -EN version जिसमें ये ही आता है ,शायद इसलिए ये गलती बार बार हो रही है,आगे से ध्यान रखूंगी,आपके प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद"
Sep 16, 2020
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए
"आदरणीय सर, मैं मोबाइल से टाइपिंग करती हूं HT -EN version जिसमें ये ही आता है ,शायद इसलिए ये गलती बार बार हो रही है,आगे से ध्यान रखूंगी,आपके प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद"
Sep 16, 2020
Harash Mahajan commented on Neeta Tayal's blog post अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए
"आदरणीय नीता तयाल जी आदाब । अच्छे भाव लिए आपकी रचना । बहुत वहुत बधाई । कुछ शब्दों में टंकण पर ध्यान दीजियेगा । जैसे...हँसते हँसते/ख़ुशियाँ/यूँही/दुनियाँ ऐसे ही कुछ और । सादर ।"
Sep 16, 2020
Neeta Tayal posted a blog post

अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए

थम सी गई जिन्दगी सबकी, थोड़ी सी हलचल हो जाए। बोर हो गए इतने दिन से , क्यूं ना कुछ मस्ती हो जाए।।ख्वाहिश है मेरी बस, पहले की तरह सब कुछ हो जाए। बहुत हो गए घर में बंद, थोड़ा सैर सपाटा हो जाए।।याद रहेंगे ये पल भी, कैसे एक दूजे से दूर रहे। कहने को तो बहुत पास थे , फिर भी दीदार को तरस रहे।।ऑनलाईन तो मात्र एक जरिया था, जीवन में खुशियां लाने का। ऑनलाईन की इस दुनियां से, अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए।।अर्जी यही है मेरी बस प्रभु से, इतिहास इसे न फिर दोहराए। बड़े से बड़ा कोई भी संकट, हंसते हंसते यूूंही कट…See More
Sep 16, 2020
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post वो बीता हुआ बचपन
"आदरणीय सर जी आपके प्रोत्साहित शब्दों के लिए आपका भौत बहुत शुक्रिया"
Sep 15, 2020
Harash Mahajan commented on Neeta Tayal's blog post वो बीता हुआ बचपन
"वाह नीता तयाल जी बेहद सुंदर सृजन । आदरणीय समर कबीर जी ने तफ़सील जो बता दिया है  । सादर ।"
Sep 15, 2020
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post वो बीता हुआ बचपन
"आदरणीय सर जी , त्रुटियां बताने के लिए शुक्रिया,ऐसे ही आप बताते रहिएगा,क्योंकि जब तक हमें कोई गलती नहीं बतायेगा तब तक हम वो दोहराते रहेंगे।बहुत बहुत धन्यवाद आपका"
Sep 14, 2020
Samar kabeer commented on Neeta Tayal's blog post वो बीता हुआ बचपन
"मुहतरमा नीता तायल जी आदाब, अच्छी रचना लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें । 'वो ममता के आंचल में, जाकर छुप जाऊं' इस पंक्ति में 'वो' की जगह "फिर" शब्द उचित होगा,विचार करें । इसके इलावा रचना में कुछ टंकण त्रुटियाँ…"
Sep 14, 2020
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post हिन्दी बोलने में ना सकुचेंगे
"आदरणीय सर बहुत बहुत शुक्रिया आपका,माफी चाहूंगी में आपकी सुन्दर रचनाओं पर अभिव्यक्ति प्रकट नहीं कर पाती"
Sep 13, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Neeta Tayal's blog post हिन्दी बोलने में ना सकुचेंगे
"आ. नीता जी, सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 13, 2020
Neeta Tayal posted a blog post

वो बीता हुआ बचपन

वो बीता हुआ बचपन , कहां से लाऊं? ना आज की चिन्ता , ना कल की फिकर, हरदम हरपल बस खुल के मुस्कुराऊं।। खेलूं कूदूं और जी भर के खाऊं। बीमारी के डर को, मैं भूल जाऊं।। स्कूल से घर और घर से स्कूल। के रास्ते भर दोस्तों से, जी भर बतियाऊं।। कभी रूठूं ,कभी मटकूं , नाज नखरे दिखाऊं। मम्मी से हर जिद, अपनी मनवाऊं।। वो ममता के आंचल में, जाकर छुप जाऊं। जिम्मेदारियों से कुछ पल, निजात मैं पाऊं।। नीता तायल मौलिक और अप्रकाशितSee More
Sep 13, 2020
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post नाम आपका रोशन कर दूं
"आदरणीय सर जी ,आपके प्रोत्साहित शब्दों ने मुझ में एक नई ऊर्जा भर दी है"
Sep 12, 2020
Harash Mahajan commented on Neeta Tayal's blog post नाम आपका रोशन कर दूं
"आदरणीय नीता तयाल जी खूबसूरत आगाज़ किया है आपने । बहुत अच्छी रचना । दाद कबूल कीजियेगा ।"
Sep 12, 2020

Profile Information

Gender
Female
City State
Kasganj, Uttar Pradesh
Native Place
Agra
Profession
Housewife

Neeta Tayal's Blog

अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए

थम सी गई जिन्दगी सबकी,

थोड़ी सी हलचल हो जाए।

बोर हो गए इतने दिन से ,

क्यूं ना कुछ मस्ती हो जाए।।

ख्वाहिश है मेरी बस,

पहले की तरह सब कुछ हो जाए।

बहुत हो गए घर में बंद,

थोड़ा सैर सपाटा हो जाए।।

याद रहेंगे ये पल भी,

कैसे एक दूजे से दूर रहे।

कहने को तो बहुत पास थे ,

फिर भी दीदार को तरस रहे।।

ऑनलाईन तो मात्र एक जरिया था,

जीवन में खुशियां लाने का।

ऑनलाईन की इस दुनियां से,

अब तो जीवन ऑफलाइन…

Continue

Posted on September 15, 2020 at 10:30pm — 5 Comments

वो बीता हुआ बचपन

  • वो बीता हुआ बचपन , कहां से लाऊं? ना आज की चिन्ता , ना कल की फिकर, हरदम हरपल बस खुल के मुस्कुराऊं।। खेलूं कूदूं और जी भर के खाऊं। बीमारी के डर को, मैं भूल जाऊं।। स्कूल से घर और घर से स्कूल। के रास्ते भर दोस्तों से, जी भर बतियाऊं।। कभी रूठूं ,कभी मटकूं , नाज नखरे दिखाऊं। मम्मी से हर जिद, अपनी मनवाऊं।। वो ममता के आंचल में, जाकर छुप जाऊं। जिम्मेदारियों से कुछ पल, निजात मैं पाऊं।। नीता तायल मौलिक और अप्रकाशित

Posted on September 12, 2020 at 11:02pm — 5 Comments

हिन्दी बोलने में ना सकुचेंगे

"हिन्दी बोलने में ना सकुचेंगे"

हिन्दी मातृभाषा है मेरी,

फिर क्यूं बोलने में शरमाऊं।

पट पट पट पट अंग्रेजी बोलना,

क्यूं ही मैं हरदम चाहूँ।।

हिन्दी बोलूं तो गंवार लगूं,

जो अंग्रेजी बोलूं तो शान।

क्यूं हम हिन्दी होकर भी,

नहीं करते हिन्दी का सम्मान।।

विदेशी भारत आकर भी,

इंग्लिश में ही बातें करता।

फिर भारतीय विदेश में जाकर ,

क्यूं हिन्दी बोलने में है कतराता ।।

गीता का उपदेश भी कृष्ण ने ,

हिन्दी में ही सुनाया है।…

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Posted on September 8, 2020 at 10:00am — 4 Comments

गुरू नमन

कच्ची मिट्टी का ढेला था,

छोटा सा जीव नादान था।

क्या सही और क्या गलत,

इस सबसे अनजान था।।



प्रथम गुरु मेरे मात पिता हैं,

चरणों में उनके नमन करूं।।

ज्ञान दिया है मुझको इतना,

शब्दों में कैसे बयां करूं?



नमन मेरा सभी गुरुओं को,

वंदन बारंबार है।

अज्ञानता के अन्धकार को मिटा,

फैलाया जीवन में प्रकाश है।



धन्यवाद उन मित्रों का भी,

जो हरदम मुझको ज्ञान हैं देते।

खेल खेल में सहज भाव से,

मुझमें नई ऊर्जा भर… Continue

Posted on September 3, 2020 at 3:27pm — 4 Comments

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At 6:25pm on July 7, 2020, Neeta Tayal said…
मायका और ससुराल दोनों हैं तुल्य
नारी जीवन में दोनों ही बहुमूल्य
मायका वो है ,जहां बचपन बिताया
शादी के बाद, घर ससुराल का सजाया
मां बाप के जैसे, सास ससुर का प्यार
आशीर्वाद से उनके, खुल जाए किस्मत के द्वार
भाई समान मिलता, देवर का रिश्ता
कई मुश्किलों से उबारे ,वो बनकर फरिश्ता
बहन समान, प्यारी नखरीली नंद
भाभी हैं लड्डू, तो वो है कंद
प्यार करो दोनों से, बिल्कुल एक समान
झोली भरे खुशियों से और जिंदगी बने आसान
 
 
 

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