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Satyanarayan Singh
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"आदरणीय अजय गुप्ता जी  कुकुभ छंद पर आधारित प्रदत्त चित्र के अनुकूल सुन्दर रचना हार्दिक बधाई स्वीकार करें गुनीजनों द्वारा  इंगित किये दोष को अवश्य संज्ञान में लीजियेगा  "
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"आदरणीय दंडपानी नाहक जी कुंडलिया छंद पर सुन्दर एवं सार्थक प्रयास हेतु हार्दिक बधाई "
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"आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी इस सुन्दर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें "
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"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सादर           प्र्दत्त्त चित्रानुकुल सुन्दर कुकुभ छंद की प्रस्तुति एवं सुन्दर संशोधन हेतु  सादर बधाई स्वीकार करें            प्यास लगी हो तब लगता जल, बहती…"
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"आदरणीय सतीश मापतपुरीजी प्रदत्त चित्रानुकुल सुंदर कुंडलिया छंद हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें. "
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"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी प्रदत्त चित्र के भाव को छंद में बहुत ही सुन्दरता से उकेरा है सादर बधाई "
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"आदरणीय अखिलेश जी सादर     प्रदत्त चित्र पर परिभाषित करते दोनों छंद बहुत ही सुन्दर रचे है   बाकी  गुनीजनों ने कुकुभ छंद में निहित दोष के प्रति आगाह कर ही दिया है इस सुंदर प्रस्तुति हेतु सादर बधाई  स्वीकार करें "
yesterday
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते  सुन्दर छंद रचे है  कुकुभ छंद में  शिल्पगत दोष के बावजूद  भाव अति उत्तम एवं शानदार कुण्डलिया छंद की प्रस्तुति हेतु सादर बधाई स्वीकार करें "
yesterday
Satyanarayan Singh commented on Satyanarayan Singh's blog post अबला नहिं आज रही महिला
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी नहीं को नहिं लिखना सवैया  विधान अनुसार मान्य है इस सन्दर्भ में अधिक जानकारी मंच के पटल पर भारतीय छंद विधान सवैया  अंतर्गत उपलब्ध है सादर "
Jul 8
Satyanarayan Singh commented on Satyanarayan Singh's blog post अबला नहिं आज रही महिला
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी नहीं को नहीं लिखना सवैया  विधान अनुसार मान्य है इस सन्दर्भ में अधिक जानकारी मंच के पटल पर भारतीय छंद विधान सवैया  अंतर्गत उपलब्ध है सादर "
Jul 8
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"हृदयतल से आभार आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन"
Jul 8
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"हृदयतल से आभार आदरणीय बृजेश कुमार जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन"
Jul 8
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"हृदयतल से आभार आदरणीया नीलम  जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन"
Jul 8
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"हृदयतल से आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन"
Jul 8
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"हृदयतल से आभार आदरणीय श्यामनारायण जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन"
Jul 8
Satyanarayan Singh commented on Satyanarayan Singh's blog post अबला नहिं आज रही महिला
"हृदयतल से आभार आदरणीय समर कबीर जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन"
Jul 8

Profile Information

Gender
Male
City State
Kalyan (Mumbai) महाराष्ट्र
Native Place
Pratapgarh Uttar Pradesh
Profession
State Government Service
About me
passionate about poem

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अबला नहिं आज रही महिला

दुर्मिल सवैया

अबला नहिं आज रही महिला, सबला बन राज करे जगती।

मुहताज नहीं सब काज करे, मन ओज अदम्य सदा भरती ।।

धरती नभ नाप रही पल में, प्रतिमान नये नित है गढ़ती।

यह बात सभी जन मान गये, अब नार नहीं अबला फबती।१।

परिधान हरा तन धार खुशी, ललना गल धीरज हार गहा।

सिर बाँध दुकूल उमंग नया, मन केशरिया रँग आज लहा।।

शुभ कंगन साहस हाथ भरा, मुख आस सुहास विराज रहा।

पथ उन्नति एक चुना उसने, बिसरे सब पंथ विराग…

Continue

Posted on June 25, 2018 at 8:26pm — 13 Comments

जताएं मातृ दिन पर हम

विधाता छंद 

जताएं मातृ दिन पर हम.....

जगत में मात के जैसा,नहीं दूजा दिखा भाई !

कहो माता कहो मम्मी, कहो चाहे उसे माई  !

पुकारे बाल माँ जब भी, तुरत वह दौडकर आई !

बुरा माना नहीं उसने, कभी मन बाल रुसवाई …

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Posted on May 13, 2018 at 3:30am — 4 Comments

कह-मुकरियाँ

कह-मुकरियाँ

जाऊँ जहाँ वहीं वह  होले,

संग संग वह मेरे डोले,

जीवन उसके बिना अलोन,

क्यों सखि साजन ? ना सेल फोन !

 

हाल चाल सब रखता मेरा,

हमदम सा वह मीत घनेरा,

मै कश्ती तो  वह है साहिल,

क्यों सखि साजन ? ना मोबाइल !

 

चहल पहल वह रौनक लाये,

महफिल में भी रंग जमाये,

उसके बिन जीवन है काहिल,

क्यों सखि साजन ? ना मोबाइल !

.

मौलिक व अप्रकाशित

 

 

 

Posted on May 1, 2018 at 3:00pm — 6 Comments

विहग निज चोंच में देखो,,,,,,

विहग निज चोंच में देखो,,,,,,

विहग निज चोंच में देखो, अहा! मछली दबोचे है|

फँसी खग कंठ में मछली, पड़े तन पर खरोंचे हैं ||

विहग औ मीन दोनों इक, सरीखे ही अबोले हैं |

मगर इक हर्ष दूजी भय, सँजोये आँख बोले हैं |१ |

उदर की भूख मिट जाए, यही चाहत विहग पाले |

वहीं पर मीन के देखो, पड़े हैं जान के लाले ||

सलामत जान की अपने, खुदा से चाहती मछली |

निवाला छूट ना जाए, यही मन सोचती बगुली |२ |



मौलिक और अप्रकाशित…



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Posted on March 30, 2018 at 1:30pm — 12 Comments

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At 1:02pm on October 27, 2016, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जनम दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं आपको श्री सत्यनारायण सिंह जी | प्रभु आपको सदा सुखी और स्वस्थ रखे | ज्योतिर्मय पर्व की भी अग्रिम मंगल कामनाए | शुभ शुभ !

At 7:27pm on October 27, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

सत्य नारायन जी

बार बार यह दिन आये i  ढेरो सी खुशिया लाये i

सादर i

At 4:41pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 10:32am on October 27, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें आदरणीय सत्यनारायण जी.."

At 9:13am on September 2, 2013, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

नारायण भाई- सप्रेम राधे- राधे॥ सावन -गीत को दिल से पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद॥

 
 
 

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