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sunanda jha
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  • सुरेश अग्रवाल
 

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sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"हृदयतल से आभार आदरणीय ,रचना को इतनी बारीकी से पढ़कर उसकी सटीक समीक्षा के लिए ।प्रयास करुँगी उचित संशोधन करने का सादर ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"हृदयतल से आभार आदरणीय मेरा हौसला बढ़ाने के लिए ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"हृदयतल से आभार आदरणीय, रचना को बारीकी से पढ़कर उसका मान  और मेरा हौसला बढ़ाने के लिए सादर ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीय ,सही सुझाव दिया आपने ठीक कर लेती हूं सादर ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"दिल से शुक्रिया सर ,रचना को पढ़ कर उसका मान बढ़ाने के लिए।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र को सार्थक करता अप्रतिम सृजन आदरणीय ,कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर । विनम्र निवेदन- प्रार्थना के शोर में - शायद १२ मात्राएँ हैं सादर ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आदरणीया , मेरा हौसला बढ़ाने के लिए । "
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"हृदयतल से आभार आदरणीय ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"जी आदरणीय ,कोटिशः आभार आ० प्रतिभा जी का ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आ० प्रतिभा जी ,मुझे विधान की जानकारी नहीं थी सादर ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"उल्लाला छंद देखा है जब गौर से ,चित्र लगा यह बोलने ।रोटी आतुर जेब की ,सत्ता का सच खोलने । पढ़ने की है गर्ज या ,ललचाती हैं रोटियाँ।हाथ जोड़ बालक खड़ा ,प्यारी सी दो चोटियाँ। सारे बच्चे लीन हैं ,गाते दिखते प्रार्थना ।माँ -शारदे पूर्ण करें ,शिशुओं की…"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"वाहह आदरणीय ,चित्रानुकूल बहुत सुंदर छन्द रचा आपने ! कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर । एक संशय है आदरणीय - उल्लाला के विधानानुसार शायद सम चरणों के तुकांत सुमेलित करने होते हैं सादर ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"भूख जीव को ज्ञान की,देती दीक्षा रोज कुछभूखे ही करते रहे,नई-नई-सी खोज कुछ ..... चित्र को सार्थक करता बहुत प्यारा गीत लिखा आदरणीय ,कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"वाहहहहहह आ० प्रतिभा जी ! चित्रानुकूल सुन्दर सृजन के लिए कोटिशः बधाई स्वीकारें सादर ।"
Feb 16
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"अप्रतिम! अनुपम लेखन आदरणीया ,नमन है आपकी लेखनी को । मेरा हौसला बढ़ाने के हृदयतल से आभार आदरणीया ।"
Dec 15, 2019
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आपको रचना पसन्द आई लेखन सार्थक हुआ आदरणीया ,हृदयतल से आभार आपका ।"
Dec 15, 2019

Profile Information

Gender
Female
City State
Gandhidham
Native Place
Madhubani
Profession
home maker
About me
I'm a house wife having ineterest in reading , writing ,and painting

Sunanda jha 's Blog

समानिका छंद

यह एक समवार्णिक छंद है ,जिसमें प्रत्येक चरण में 7 वर्ण होते हैं ,जिनका क्रम 1 रगण + 1 जगण + 1 गुरू होता है।



21 21 21 2 ,21 21 21 2





चाँद खो गया कहीं रात है बता रही।

नींद में सुहासिनी स्वप्न है सजा रही।



प्रीत खो गयी कहीं बावरी पुकारती । पैर के निशान को आस से निहारती ।



तेज है हवा हुई रात भी सियाह है ।

सूझती न राह भी ,वेदना अथाह है ।



ख्वाहिशें मरी नहीं हौसला बुलंद है ।

पाप पुण्य में छिड़ा अंतहीन द्वंद्व है… Continue

Posted on August 28, 2017 at 7:41pm — 10 Comments

अनमोल मोती : (लघुकथा)

" माँ .... काकी माँ ....बेटी ......दीदी ....", ---चारों ओर से पुकारती ये आवाज़ें सुधा के कानों में अमृत घोलती ।

" सुधा .....! ", --अचानक चौंक गई आवाज़ को सुनकर ।

" क्या लेने आए हो अब ? "-- उसको देखते ही सुधा की आँखों में रोष उतर आया था ।

" मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ सुधा ... मुझे माफ कर दो । " -- गिड़गिड़ा रहा था रवि ।

" क्यों वो चली गई क्या किसी और के साथ ; जिसके लिए मुझे छोड़ गए थे । "

" प्लीज़ सुधा ; मैं अपराधी हूँ तुम्हारा । घर चलकर जो भी सजा दोगी मंजूर है । "…

Continue

Posted on May 26, 2015 at 6:30am — 10 Comments

मजबूरी (लघुकथा )

"एइ जे ! हाजरा मोड़ जाएगा ? "

"हाँ साहेब, जाएँगे ।"

"किराया कितना ?"

"बीस टाका !"

"गला काटता है रे ...!! "

"नहीं साहेब , ऑटो तो पचास टाका लेगा ।"

"ओ ले शकता है, पेट्रोल से जो चलता है ना ।"

"ठीक है साहेब ...जो मर्जी दे दीजिएगा ।" पेट्रोल का कीमत सब को पता है, खून का कीमत? सोचता रिक्शा खींचने लगा ।

"बस बस ...! यहीं रोको ...!" दस रूपये रख कर चलता बना ।

जेब से दिन भर की कमाई निकाल कर हिसाब लगा रहा था बुधिया... रिक्शा का किराया देने…

Continue

Posted on May 23, 2015 at 9:30am — 10 Comments

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At 6:41pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
आदरणीय मुझे समझ नहीं आ रहा अपनी गज़ल कहाँ पोस्ट करूँ ?
At 6:39pm on April 23, 2016, sunanda jha said…
मिसरा - जिसे हो जुस्तजू खुद की वो बेचारा किधर जाए ।
रदीफ़ - जाए
काफ़िया -अर

'गज़ल '

जिसे तक़दीर ठुकरा दे कहो वो किस डगर जाए ।
मिलें रुसवाइयां ही फिर जहाँ में वो जिधर जाए ।

करे लाखों जतन खुद से नहीं वो जीत पाएगा ।
उलझकर द्वन्द्व में उसका बचा जीवन गुजर जाए ।

गमों को बांटने वाला ,हमेशा साथ है अपने ।
जिसे हो जुस्तजू अपनी वो बेचारा किधर जाए ।

न तोड़ो इस कदर दिल को ,नहीं फिर जोड़ना मुमकिन ।
समेटें किस तरह दिल को जमीं पर जो बिखर जाए ।

मिले जो जख्म अपनों से नहीं फिर ठीक होते है ।
लगाओ लाख मरहम भी नहीं उसका असर जाए ।

यही है आरजू मेरी पिला तब तक मुझे साकी ।
जहर बन खून में मेरे न जब तक मय उतर जाए ।

नहीं मिलता कभी मोती हजारों 'सीप' भी ढूंढो ।
गिरे इक बूँद स्वाती की बने मोती निखर जाए ।

सुनंदा 'सीप '

(मौलिक व अप्रकाशित )
23/4/2016
At 12:45pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप गद्य तथा पद्य की किसी भी विधा में रचना प्रस्तुत कर सकती है. यथा -

लघुकथा 

कहानी

तुकांत कविता
अतुकांत आधुनिक कविता
हास्य कविता
गीत-नवगीत
ग़ज़ल
हाइकू
व्यंग्य काव्य
मुक्तक
शास्त्रीय-छंद (दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि-आदि)

सादर 

At 12:19pm on May 11, 2015, sunanda jha said…
जी जरूर सिर्फ कथा या कविता और गज़ल भी ? सादर ।
At 12:06pm on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचना यहाँ पोस्ट कर सकती है,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जाता है, रचना के अंत में"मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम अवश्य देखे.

At 9:00am on May 11, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

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