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प्रशांत दीक्षित
  • Male
  • Bhopal, Madhya Pradesh
  • India
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प्रशांत दीक्षित updated their profile
May 17
प्रशांत दीक्षित commented on प्रशांत दीक्षित's blog post वीर जवान
"बहुत बहुत धन्यवाद लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' जी । बहुत बहुत धन्यवाद समर कबीर जी"
Feb 5
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वीर जवान

फ़ाइलातुन  फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन2122   2122 2122धमनियों में दौड़ता यूँ तो सदा है ।।रक्त है जो देश हित में खोलता है ।।हौसला उस वीर का देखो ज़रा तुम ।गोलियों की धार में सीना तना है ।।        रणविजय तक सांस ये चलती रहेगी ।जीत से पहले यहाँ मरना मना है ।।रक्त की हर बूंद रण में है गिरी जो बूंद से  रण बांकुरा इक उठ खड़ा हैहर जनम तेरा ही बेटा मैं बनूं माँ ।आयु कम मां भारती का ऋण बड़ा है ।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Jan 31
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित's blog post वीर जवान
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । जनाब मुसाफ़िर जी की बात का संज्ञान लें ।"
Jan 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on प्रशांत दीक्षित's blog post वीर जवान
"आ. भाई प्रशांत जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।  होसला को हौसला कर लीजिएगा  बूंद से  रण बांकुरा इक उठ खड़ा है इस मिसरे को यूँ करने से गुणवत्ता निखर सकती है ..सादर 'उससे नव रण बांकुरा इक उठ खड़ा है'"
Jan 27
प्रशांत दीक्षित posted a blog post

वीर जवान

फ़ाइलातुन  फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन2122   2122 2122धमनियों में दौड़ता यूँ तो सदा है ।।रक्त है जो देश हित में खोलता है ।।हौसला उस वीर का देखो ज़रा तुम ।गोलियों की धार में सीना तना है ।।        रणविजय तक सांस ये चलती रहेगी ।जीत से पहले यहाँ मरना मना है ।।रक्त की हर बूंद रण में है गिरी जो बूंद से  रण बांकुरा इक उठ खड़ा हैहर जनम तेरा ही बेटा मैं बनूं माँ ।आयु कम मां भारती का ऋण बड़ा है ।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Jan 25
प्रशांत दीक्षित posted a blog post

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212याद उसको कभी,मेरी आती नहीं ।और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।सो रही अब भी वो, चैन से रात भर ।अब इधर नींद आँखों में आती नहीं ।।वो मिले जब कभी,बात पूंछू यहीप्यार उसको नहीं, या जताती नहीं ।।लफ़्ज़ तेरे सभी,मेरे होंठों पे हैं ।गीत क्यूँ तू मिरे गुनगुनाती नहीं ।।तेरी हर बात का मैं तो काइल हुआ ।मेरी बातें तुझे क्यों लुभाती नहीं ।। मौलिक व अप्रकाशितSee More
Dec 6, 2019
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on प्रशांत दीक्षित's blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"http://www.openbooksonline.com/m/discussion?id=5170231%3ATopic%3A637805 आप लघुकथा की पाठशाला ज्वाइन कर सकते हैं जो ओबीओ में ही है वहां से भी आप सीख सकते हैं। सादर।"
Oct 31, 2019
प्रशांत दीक्षित commented on प्रशांत दीक्षित's blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"बहुत बहुत धन्यवाद कल्पना भट्ट'रौनक" जी । अभी सीखना प्रारम्भ किया है और मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता है । लघुकथा के विषय में कैसे सीखा जाए,इसके विषय में मार्गदर्शन दें । आपका आभारी रहूंगा । सधन्यवाद ।"
Oct 31, 2019
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on प्रशांत दीक्षित's blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीय प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी पर अभी लघुकथा नहीं बन पायी है | सादर| "
Oct 30, 2019
प्रशांत दीक्षित commented on प्रशांत दीक्षित's blog post वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"
"आदरणीय समर कबीर जी, आपके प्रेरणादायक वचनों के लिए हृदय तल से आभारी हूँ। प्रस्तुति आपको पसंद आयी तो रचना सफ़ल हुई ।बहुत-बहुत धन्यवाद ।"
Oct 29, 2019
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित's blog post वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 29, 2019
प्रशांत दीक्षित posted a blog post

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है,कहीं है चैन-ओ-सुकून,तो कहीं मुसीबत है,वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है । क्या था ख्याल तेरा,बनाया किसी को गूंगा,किसी को बहरा,बनाया तूने किसी को सबल-सुअंग,क्यों बनाया किसी को अपाहिज-अपंग?बता तो क्या तेरी चाहत है, वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है ।तू किसी से ज़ुबान छीने,किसी से हाथ,पैर,कान छीने ।क्यों तूने ऐसी सजा दी,किसी के नैनों की बत्ती बुझा दी ।या नहीं मिली तुझे,यह बनाने की फुर्सत है,वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है ।क्यों किसी के हाथ लगी निराशा, बोलनी पड़ी उसे हाथों…See More
Oct 29, 2019
प्रशांत दीक्षित commented on प्रशांत दीक्षित's blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"बहुत बहुत धन्यवाद समर सर । आपके comments से बहुत बल मिलता है ।"
Oct 28, 2019
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित's blog post लघुकथा-दीवाली के पटाखे
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब,लघुकथा का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 28, 2019
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित's blog post याद उनको कभी,मेरी आती नहीं
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई। स्वीकार करें । 'याद उनको कभी,मेरी आती नहीं । और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ' मतले में शुतरगुरबा दोष है,ऊला मिसरे में 'उनको' की जगह…"
Oct 28, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal,Madhya Pradesh
Native Place
Sagar,Madhya Pradesh
Profession
Training Officer,Dept. Of Skill Development,Madhya Pradesh

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वीर जवान

फ़ाइलातुन  फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन

2122   2122 2122

धमनियों में दौड़ता यूँ तो सदा है ।।

रक्त है जो देश हित में खोलता है ।।

हौसला उस वीर का देखो ज़रा तुम ।

गोलियों की धार में सीना तना है ।।…

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Posted on January 25, 2020 at 5:33pm — 3 Comments

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है(मुक्तछंद) -"सागर"

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है,

कहीं है चैन-ओ-सुकून,तो कहीं मुसीबत है,

वाह ख़ुदा ! क्या तेरी कुदरत है । 

क्या था ख्याल तेरा,

बनाया किसी को गूंगा,किसी को बहरा,

बनाया तूने किसी को सबल-सुअंग,…

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Posted on October 28, 2019 at 12:00pm — 2 Comments

लघुकथा-दीवाली के पटाखे

दीपावली का दिन लगभग 3:00 बजे शाम के पूजन की तैयारियां चल रही थी । माँ किचन में खीर बना रही थी,तो हमारी धर्मपत्नी जी आंगन में रंगोली डाल रही थी । मैं हॉल में बैठा हुआ व्हाट्सएप पर लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं भेज रहा था और मेरे पिताजी,मेरे पुत्र(भैय्यू),जिसने पिछले महीने अपना तीसरा जन्म दिन मनाया था,के साथ मस्ती करने में व्यस्त थे। इस मौसम में आमतौर पर मच्छर बहुत होते हैं,इसलिए पिताजी यह भी ख़याल रख रहे थे कि भैय्यू को मच्छर न कांटें और इसके लिए उन्हें काफ़ी मसक्कत भी करनी पड़ रही थी । तभी मेरा…

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Posted on October 27, 2019 at 10:23pm — 5 Comments

याद उनको कभी,मेरी आती नहीं

212 212 212 212

याद उसको कभी,मेरी आती नहीं ।

और ख्वाबों से मेरे,वो जाती नहीं ।।

सो रही अब भी वो, चैन से रात भर…

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Posted on October 19, 2019 at 10:30pm — 3 Comments

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