For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sushil Sarna's Blog – January 2026 Archive (4)

कुंडलिया. . .बेटी

कुंडलिया. . . . बेटी

बेटी  से  बेटा   भला, कहने   की   है   बात ।
बेटा सुख का   सारथी, सुता   सहे  आघात ।।
सुता   सहे    आघात, पराई   हरदम   रहती ।
जीवन के वह दर्द, सदा ही चुप - चुप सहती ।।
जाने   कितने  रूप,सुता   यह   ओढ़े    लेटी ।
सृष्टि  सृजन  आधार, मगर  है   मानो   बेटी ।।

सुशील सरना / 20-1-26

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on January 20, 2026 at 2:21pm — 2 Comments

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर पर

दोहा एकादश   . . . . पतंग

आवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग ।

बीच पतंगों के लगे, अद्भुत दम्भी जंग ।।

बंधी डोर से प्यार की, उड़ती मस्त पतंग ।

आसमान को चूमते, छैल-छबीले रंग ।।

कभी उलझ कर लाल से, लेती वो प्रतिशोध ।

डोर- डोर की रार का, मन्द न होता क्रोध ।।

नीले अम्बर में सजे, हर मजहब के रंग ।

जात- पात को भूलकर, अम्बर उड़े पतंग ।।

जैसे ही आकाश में, कोई कटे पतंग ।

उसे लूटने के लिए, आते कई दबंग ।।

किसी धर्म…

Continue

Added by Sushil Sarna on January 14, 2026 at 3:03pm — 3 Comments

कुंडलिया. . . . .

कुंडलिया. . . .

किसने समझा आज तक, मुफलिस का संसार ।
आँखें   उसकी    वेदना, नित्य   करें    साकार ।।
नित्य  करें   साकार ,  दर्द  यह  कहा  न  जाता ।
उसे  भूख  का  दंश , सदा  ही   बड़ा   सताता ।।
पत्थर   पर  ही  पीठ , टिकाई   हरदम   इसने  ।
भूखी काली रात , भाग्य  में  लिख  दी  किसने ।।

सुशील सरना / 9-1-26

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on January 9, 2026 at 1:29pm — 2 Comments

दोहा पंचक. . . क्रोध

दोहा पंचक. . . . क्रोध

मानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध ।

सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध ।।

बड़े भयानक क्रोध के, होते हैं परिणाम ।

बदले के अंगार को, मिलता नहीं विराम ।।

हर लेता इंसान का, क्रोधी  सदा विवेक ।

मिटते  इसके ज्वाल में, रिश्ते मधुर अनेक ।

क्रोध अनल में आदमी, कर जाता वह काम ।

घातक जिसके बाद में, अक्सर हों परिणाम ।।

पर्दे पड़ते अक्ल पर, जब  आता है क्रोध ।

दावानल में क्रोध की, बस लेता प्रतिशोध…

Continue

Added by Sushil Sarna on January 8, 2026 at 2:00pm — 4 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
2 hours ago
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
14 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
yesterday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
yesterday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
yesterday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
yesterday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
May 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service