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Kumar Gourav's Blog – February 2018 Archive (3)

बैल (लघुकथा)

बापू हुकुम चलाते थे और अम्मा घर। रंजन के और कोई भाई बहन न था। बापू के मुँहफट स्वभाव के कारण पड़ोसियों से भी वैर ही रहता था। चूल्हा चौका गाय गोरू और बापू की चाकरी से फुरसत मिल जाने पर अम्मा कभी कभी उसे प्यार भी कर लेती थी।

बचपन से यही चल रहा था। अब जब दसवीं की परीक्षा सर पर है ,गाय के बछड़ा हो गया है। अम्मा उसी में लगी पड़ी है। खाना भी खुद बनाया आज रंजन ने।

मामा के यहाँ जाना है वहीं रहकर परीक्षा देनी है रोज रोज बीस किलोमीटर आना जाना करेगा तो पढ़ेगा कब।

जब वह बछड़े को देखने गया तो बापू… Continue

Added by Kumar Gourav on February 27, 2018 at 1:49am — 6 Comments

वाद विवाद और मवाद

कहते हैं ठोकर खाने से अक्ल आती है लेकिन कोई छोटन तिवारी से पूछे तो कहेंगे ठोकर लगने से सर फूटता है खून आता है और रही सही अक्ल नामालूम सी जगह घुस जाती है ।

छोटन को जब अक्ल आई तब तक तीन बच्चों के बाप हो चुके थे । बाप गाँव के मानजन थे तो पंचायती दरी सफेदा इन्हीं के यहाँ रहता था। दो रूपये के हिसाब से भी गाँववालों को किराये पर देने में साल में दो चार हजार पंचायत के खाते में जमा हो ही जाता ।

देखाभाला व्यापार था तो जब पिता के न रहने पर विपत्त पड़ी तो टेंट शमियाना और लाइट साउंड वगैरह किराये पर… Continue

Added by Kumar Gourav on February 22, 2018 at 8:26pm — 1 Comment

कुलीन(लघुकथा)

कहा गया है कि,

साईं इतना दीजिए जा मै कुटुम समाय।

मै भी भूखा न रहूं , साधु न भूखा जाय।।

उनका भी यही हाल था न संपन्न थे न विपन्न , मगर कुलीन थे, तो कुल की पगड़ी के बोझ से उनका सर इस अर्थयुग में हमेशा झुका ही रहता था ।

कुलीन लोगों की तरह उनकी नाक भी बहुत सख्त थी । इतनी सख्त की एकदिन उन्होंने नाक मारकर दिनेश ताँती की बेटी का सर फोड़ दिया था । जिसका उनके भाई को आज भी गम है।

फिर एकदिन उनकी नाक पर बेटी आ बैठी । सख्त नाक बेटी के बोझ से झुकने लगी , इतना कि कभी भी टूटकर गिर सकता… Continue

Added by Kumar Gourav on February 20, 2018 at 3:35pm — 8 Comments

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