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Featured Blog Posts – March 2010 Archive (3)

एक राज कहत बानी....................

सब जान के चुप चाप अब सहत बानी
हम होश में बेहोश हो रहत बानी…
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Added by PREETAM TIWARY(PREET) on March 17, 2010 at 9:19pm — 7 Comments

गरीबी..

इक कमरे का है ये मकाँ...


यहाँ आदमियों की जगह नहीं,


खाने को दो दिनों की भूख है


पीने को रिस-रिसकर बहता पानी


बेरंग सी दीवारों की मुन्तज़िरी,


औ छत की रोती सी दीवारें


गोशों में…
Continue

Added by विवेक मिश्र on March 12, 2010 at 12:00am — 6 Comments

ज़िन्दगी की किताब से (रजनी छाबरा)

ज़िन्दगी की किताब से

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ज़िन्दगी की किताब से

फट जाता है जब

कोई अहम पना

अधूरी रह जाती है

जीने की तमन्ना

कभी कभी बागबान से

हो जाती है नादानी

तोड़ देता है ऐसे फूल को

जिसके टूटने से

सिर्फ शाख ही नहीं

छा जाती है

सारे चमन में वीरानी

रह जाता है मुरझाया पौधा

सीने में छुपाये

दर्द की कहानी

जिस पौध को पानी की बजाए

सींचना पड़ता हो

अश्कों ओर नए खून से

उस दर्द के पौधे का

अंजाम क्या… Continue

Added by Admin on March 11, 2010 at 10:30pm — 6 Comments

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pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"गमलों में अब पेड़ हैं, पौधों के हैं हाट। लाखों घर बनते गए, वन उपवन सब काट॥//वाह.बहुत सुन्दर। …"
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"लड़ने  संकट  से  हमें, रहना   है   तैयार। गला काटने गैस फिर, बने…"
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"आदरणीय अशोक जी हार्दिक आभार इस उत्साहवर्धन के लिए "
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"आदरणीय अखिलेश जी हार्दिक आभार आपने त्रुटि की तरफ ध्यान दिलाया। ये पंक्ति इस तरह होनी चाहिए/ अंधेरा…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहे   चलती तब भी साइकिल, चले नहीं जब कार। हिन्दुस्तानी   हम   कभी,…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी,  चित्र अनुरूप सुंदर दोहे।  हार्दिक बधाई। अंधेर का अर्थ अत्याचार अन्याय…"
45 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी  विस्तार से आपने वर्तमान स्थिति और चित्र के अनुरूप दोहे की रचना की है।…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"दीपक तल अंधेर है, यही चित्र का सार। आँगन गंगा धार पर,सहे प्यास की मार।।......वाह ! वक्रोक्ति का…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी , आपकी टिप्पणी सर्वथा उचित है।  चित्र को एक दो बार देखने के बाद भूल सा गया…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"पका न पाती  रोटियाँ, भले  युद्ध की आगजला रही है नित्य पर, वह निर्धन का भाग।।..... वाह !…"
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"गमलों में अब पेड़ हैं, पौधों के हैं हाट। लाखों घर बनते गए, वन उपवन सब काट॥...विकल्प गैस का नहीं. वन…"
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"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी,  मेरी कोशिश की प्रशंसा हेतु हार्दिक धन्यवाद ।"
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