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मनोज अहसास's Blog – March 2020 Archive (4)

ग़ज़ल मनोज अहसास

2122   2122     2122    212

तोड़ने से पहले मुझको आजमा कर देख ले

अपने घर के एक कोने में सजा कर देख ले

आज भी ज़िंदा है दुनिया में वफ़ा की रोशनी

अपने आंगन में कोई पौधा लगाकर देख ले

कोई अक्षर तुझको मिल जाएगा मेरे नाम का

अपने हाथों की लकीरों को मिला कर देख ले

हौसला करने से मिल ही जाता है सब कुछ यहाँ

वक़्त की भट्टी में बस खुद को तपा कर देख ले

सबसे बढ़कर खूबसूरत कैसे हैं तेरी हया

आइने को आंखों में काजल सजाकर देख…

Continue

Added by मनोज अहसास on March 31, 2020 at 12:31am — 6 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

कैसा हाहाकार मचा है मालिक करुणा बरसाओ

सन्नाटा खुद चीख रहा है मालिक करुणा बरसाओ

भूख, गरीबी, लाचारी से पहले ही आतंकित थे

एक नया तूफान उठा है मालिक करुणा बरसाओ

वादा तुमने किया था सबसे भीड़ पड़ी तो आओगे

खतरे में फिर मानवता है मालिक करुणा बरसाओ

कौन सुनेगा टेर हमारी बिना तुम्हारे ओ पालक

बेबस मानव कांप गया है मालिक करुणा बरसाओ

तुमने साथ दिया न तो फिर किसके दर पर जाएंगे

सबके मन मे व्याकुलता है मालिक करुणा…

Continue

Added by मनोज अहसास on March 30, 2020 at 10:19pm — 1 Comment

ग़ज़ल मनोज अहसास

1222×4

किसी की याद में ज़ख्मों को दिल मे पालते रहना,

तबाही का ही रस्ता है यूँ शोलों पर खड़े रहना।

न जाने कौन से पल में कलम गिर जाए हाथों से,

मगर तुम आखिरी पल तक ग़ज़ल के सामने रहना।

जहाँ पर शाम ढलती है वहाँ पर देखकर सोचा,

मेरी यादों में रहकर तुम यूँ ही मेरे बने रहना।

वो आएं या न आएं ये तो उनकी मर्जी है लेकिन,

मुहब्बत की है तो बस रास्ते को देखते रहना।

किसी सूरत भी मेरा दिल बहल सकता नहीं फिर…

Continue

Added by मनोज अहसास on March 4, 2020 at 11:00pm — 1 Comment

ग़ज़ल मनोज अहसास

122×8



मेरे साथ कोई ज़रा मुस्कुरा ले,

कलेजा बहुत भारी होने लगा है।

ये जीवन का रस्ता वहाँ आ गया है,

जहाँ हर किसी को मुझी से गिला है।



वो बचपन के साथी जो खाते थे कसमें,

रहेंगे सदा साथ जीवन डगर में।

कोई अपनी मंजिल पर तन्हा खड़ा है,

कोई जिंदगी के भंवर में फंसा है।



जो पाए हैं तुझको खुदी को मिटा कर,

वो पैगाम ए उल्फत ही देकर गए पर,

तेरा सबसे मिलना वो चेहरे बदल कर,

जमाने में झगड़े का जरिया बना है।



मुलाकात का कोई वादा… Continue

Added by मनोज अहसास on March 1, 2020 at 10:45pm — 4 Comments

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