For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's Blog – April 2020 Archive (2)

ग़ज़ल (इंक़लाब)

2212/ 1211/ 2212/ 12 

चेहरा छुपा  लिया है सभी  ने नका़ब  में, 

परदा नशीं बने  हैं सभी  इस अ़ज़ाब में।

आक़ा  हो या अ़वाम सभी फ़िक्रमन्द  हैं, 

अब घिर चुकी है पूरी जमाअ़त इताब में।

फ़ाक़ाकशी न कर दे कहीं ज़िन्दगी फ़ना,

सब लोग मुब्तिला  हैं  इसी इज़्तिराब में।

करता  रहा  ग़रूर सदा जिस  ग़िना पे  तू , 

क़ुदरत न कुछ है आज तेरे इस निसाब में।

क्या ये अ़ज़ाब है या कोई  इम्तिहान है ?, 

ये …

Continue

Added by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on April 20, 2020 at 5:30pm — 5 Comments

ग़ज़ल (अन्दाज़ ए नज़र )

रौशनी दिल में नहीं हो तो ख़तर बनता है,

आग सीने में लगी  हो तो शरर  बनता है।

जिसको ढाला न गया हो किसी भी साँचे में, 

इब्ने आदम यूं ही हरगिज़ न बशर बनता है। 

टूट  जाते  हैं कई  रिश्ते  ग़लत  फ़हमी  से,

रंजिशें ख़ुद ही भुला दे जो, बशर बनता है।

बात जो निकली ज़बां से न वो फिर रुकती है,

राज़  हो जाए  अ़यां  गर, तो ज़ह'र  बनता है।

अदबियत जिसको विरासत में ही मिल जाती हो,

तब कहीं  जा के  'अ़ली'  कोई  'जिगर'…

Continue

Added by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on April 6, 2020 at 6:26pm — 5 Comments

Monthly Archives

2025

2024

2023

2022

2021

2020

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीय "
4 seconds ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय दयाराम जी, ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए, मार्गदर्शन तो विद्वान ही करेंगे। धन्यवाद "
4 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए "
8 minutes ago
Manan Kumar singh commented on Admin's group भोजपुरी साहित्य
"गजल आईं एगो नज़्म भइल बादेखीं सब रउए कइल बा।1 हहरल हियरा रउए खातिरइचिको ना एमे मइल बा।2 नयन मटक्का…"
8 minutes ago
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

कुंडलिया

दरियादिल हो बाप जब, करता कन्यादान।दयावान भगवान हो, रखता उसका मान।रखता उसका मान, भात नरसी-सा भरता।आठ…See More
54 minutes ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय शाहज़ाद उस्मानी साहब , नमस्कार। हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया।"
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अजय गुप्ता जी, आपका सुझाव भी अच्छा लगा, इस पर विचार करती हूॅं आपने दूसरे मिसरे पर भी ध्यान दिया।…"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"आदाब। सत्य और सत्य के चारों ओर के वातावरण, परिदृश्य और हालात शाब्दिक करती रचना हेतु हार्दिक बधाई…"
1 hour ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"बहुत शुक्रिया जी "
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। गिरह वाला शे'अर अच्छा लगा जनाब दयाराम मेठानी जी। "
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"वाह। अंतिम शे'अर में बढ़िया प्रयोग आदरणीय अजय जी।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदाब। गिरह वाले बढ़िया शे'अर के साथ अच्छी कोशिश। कहते हैं ग़ज़ल को पढ़कर या गाकर देखने से दोष…"
1 hour ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service