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SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR's Blog – June 2013 Archive (2)

छटपटाया बहुत चाँद

छटपटाया बहुत चाँद

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रात बारिश बहुत जोर की थी प्रिये

देख चेहरा तेरा चाँद में खो गया…

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Added by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on June 24, 2013 at 10:30pm — 19 Comments

एक तल्ले पे था चाँद तो उन दिनों

पर कटे से पड़े तडफडाते रहे 

इश्क़ में उनके ऐसे फँसे दोस्तोँ !

 

रूबरू वो हुये चार पल के लिए 

जाम नैनों अधर के पिला दोस्तों !

 

मयकशी में मुकद्दर के मारे तभी 

लूट हँसते चले रोते हम दोस्तों…

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Added by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on June 10, 2013 at 1:00am — 16 Comments

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