प्रतिपल अच्छा देखिए
आंंख चुरा कर घूमते, मिला न पाए आंख.
आखों के तारे मगर, बिखरे जैसे पांख.1
आसमान से बात कर, मत अम्बर पर थूंक.
कण्ठ-हार बन कर चमक, अवसर पर मत चूक.2
प्रतिपल अच्छा देखिए, अच्छे में उत्साह.
बालमीकि - रैदास भी, हुए ब्रह्म के शाह.3
अच्छे दिन की सोच में, बुरी नहीं यदि सोच.
दीन-हीन के दु:ख भी दूर करें बिन खोंच.4
संसारिक उद्देश्य ने, रिश्ते गढ़े…
ContinueAdded by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 13, 2016 at 8:30am — 8 Comments
मुहावरों में दोहा छंद की छटा...
गाल बजा कर दल गये, जो छाती पर मूंग.
वही अक्ल के अरि यहां, बने खड़े हैं गूंग. १
शीष ओखली में दिया, जब-जब निकले पंख.
उंगली पर न नचा सके, रहे फूंकते शंख. २
डाल आग में घी करे, हवन दमन की चाह.
अंत घड़ों पानी पियें, खुलती कलई आह. ३
फूंक-फूंक कर रख कदम, कांटों की यह राह.
खेल जान पर तोड़ना, चांद-सितारे- वाह. ४
अपने पैरों पर करें, लिये कुल्हाड़ी वार.
दोष…
ContinueAdded by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 11, 2016 at 9:30am — 10 Comments
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