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एक नया दस्तूर चलाया जा सकता है
ग़म को भी महबूब बनाया जा सकता है [1]
अपने आप को यूँ तड़पाया जा सकता है
बीती बातों पर पछताया जा सकता है [2]
यार की बाँहों में अब दम घुटता है मेरा
जन्नत से भी तो उकताया जा सकता है [3]
आशिक़ सा मासूम कहाँ पाओगे जिस से
अपना कह कर सब मनवाया जा सकता है [4]
पहली बार महब्बत छूती है जब दिल को
उस लम्हे को कैसे भुलाया जा सकता है [5]
जीत…
ContinueAdded by रवि भसीन 'शाहिद' on August 9, 2020 at 12:42pm — 17 Comments
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