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एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)

22 / 22 / 22 / 22 / 22 / 22

एक नया दस्तूर चलाया जा सकता है
ग़म को भी महबूब बनाया जा सकता है [1]

अपने आप को यूँ तड़पाया जा सकता है
बीती बातों पर पछताया जा सकता है [2]

यार की बाँहों में अब दम घुटता है मेरा
जन्नत से भी तो उकताया जा सकता है [3]

आशिक़ सा मासूम कहाँ पाओगे जिस से
अपना कह कर सब मनवाया जा सकता है [4]

पहली बार महब्बत छूती है जब दिल को
उस लम्हे को कैसे भुलाया जा सकता है [5]

जीत नहीं पाए यारो तो क्यूँ ये मातम
हार का भी तो जश्न मनाया जा सकता है [6]

फ़ुर्सत में शहकार बने ये मुमकिन है और
काम में कोरा वक़्त गँवाया जा सकता है [7]

कह दो जाकर महलों में रहने वालों से
मिट्टी के घर को भी सजाया जा सकता है [8]

जंग-ओ-जदल की आँधी में बेबस हैं फिर भी
अम्न का परचम तो लहराया जा सकता है [9]

देख रहा हूँ रस्ता मैं उस शे'र का 'शाहिद'
जिस पर इक दीवान लुटाया जा सकता है [10]
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
––––––––––––––––––––––
कठिन शब्दों के अर्थ:
1. शहकार = अति उत्तम रचना, उत्कृष्ट कृति
2. जंग-ओ-जदल = लड़ाई झगड़ा

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Comment

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Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on August 19, 2020 at 1:58pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' भाई, आप की नवाज़िश और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बेहद शुक्रगुज़ार हूँ।

Comment by नाथ सोनांचली on August 17, 2020 at 4:39pm

आद0  भाई रवि भसीन जी सादर अभिवादन।  बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। इस उम्दः ग़ज़ल पर कोटिश बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on August 12, 2020 at 4:40pm

आदरणीय Sarfaraz kushalgarhi भाई, आपका हार्दिक आभार। मंच पर आपका बहुत स्वागत है।

Comment by Sarfaraz kushalgarhi on August 12, 2020 at 4:33pm

बहुत ख़ूब भाई लाजवाब 

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on August 11, 2020 at 12:30pm

आदरणीया Madhu Passi 'महक' साहिबा, ग़ज़ल तक आने के लिए और प्रोत्साहित करने के लिए आपका हार्दिक आभार!

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on August 11, 2020 at 12:28pm

आदरणीय सालिक गणवीर साहिब, आपकी नवाज़िश और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बेहद शुक्रगुज़ार हूँ जनाब, और ख़ास दाद के लिए आपका विशेष धन्यवाद!

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on August 11, 2020 at 12:24pm

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, आदाब अर्ज़ है! इस नाचीज़ की ग़ज़ल को अपनी दाद-ओ-तहसीन से नवाज़ने के लिए आपका तह-ए-दिल से शुक्रिय: हुज़ूर-ए-वाला!

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 11, 2020 at 12:18pm
रवि भसीन'शाहिद' जी नमस्कार! बहुत ही सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।
Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on August 11, 2020 at 12:16pm

आदरनीय आशीष यादव साहिब, हौसला बढ़ाने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय:!

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on August 11, 2020 at 12:15pm

आदरणीय Shyam Narain Verma जी, सादर नमन। आपकी कृपा और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार मान्यवर।

 

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