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दिनेश कुमार's Blog – October 2017 Archive (4)

ग़ज़ल -- दूर कर बद-गुमानी मेरी // दिनेश कुमार

212---212---212



दूर कर बदगुमानी मेरी

ख़त्म हो सरगरानी मेरी



मेरे जीवन से तुम क्या गए

खो गई शादमानी मेरी



अब न आएगी ये लौटकर

जा रही है जवानी मेरी



बीती बातों पे ये बारहा

व्यर्थ की नोहा ख़्वानी मेरी



ग़म के दरिया में रक्खा है क्या

भूल जाओ कहानी मेरी



गुल खिलाएगी कोई नया

एक दिन हक़-बयानी मेरी



ऐ मेरे जिस्म ! ऊबा हूँ मैं

अब न कर मेज़बानी मेरी



मौलिक व… Continue

Added by दिनेश कुमार on October 29, 2017 at 7:14am — 11 Comments

ग़ज़ल -- इस्लाह हेतु / ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को / दिनेश कुमार

2122--1212--22



ज़िन्दगी भर सलीब ढ़ोने को

हक़परस्ती है सिर्फ़ रोने को



दिल को पत्थर बना लिया मैंने

ख़्वाब आँखों में फिर पिरोने को



दूर मंज़िल है वक़्त भी कम है

कौन कहता है तुम को सोने को



एक बस वो नहीं हुआ मेरा

क्या नहीं होता वर्ना होने को



किस लिये हैं इन आँखों में आँसू

पास भी क्या था जब कि खोने को



ज़िद नहीं करता अब खिलौनों की

क्या हुआ दिल के इस खिलौने को



दाग़ कुछ ऐसे भी हैं दामन पर

अश्क… Continue

Added by दिनेश कुमार on October 15, 2017 at 11:56pm — 14 Comments

ग़ज़ल --- ख़ुदकुशी बार बार कौन करे // दिनेश कुमार

2122---1212---112/22
.
ख़ुदकुशी बार बार कौन करे
आप का इन्तिज़ार कौन करे
.
आइना टूटने से डरता है
झूट को शर्मसार कौन करे
.
अपना मतलब निकालते हैं सब
बे-ग़रज़ हमसे प्यार कौन करे
.
नाव टूटी है हौसला ग़ायब
ग़म के दरिया को पार कौन करे
.
हम हक़ीक़त से मुँह चुराते हैं
ख़्वाब को तार तार कौन करे
.
उस्तरा बन्दरों के हाथ में है
इन को सर पर सवार कौन करे
.
( मौलिक व अप्रकाशित )

Added by दिनेश कुमार on October 10, 2017 at 5:33am — 8 Comments

ग़ज़ल -- ग़लती कर पछताए कौन // दिनेश कुमार

22__22__22__2
.
ग़लती कर पछताए कौन
ख़ुद से नज़र मिलाए कौन
.
अपनी अना मिटाए कौन
सच्ची अलख जगाए कौन
.
पिछले लेखे-जोखे हैं
अपने कौन पराए कौन
.
राम भी कब से भूखे हैं
झूठे बेर खिलाए कौन
.
कस्तूरी मिल जाएगी
ख़ुद में गहरे जाए कौन
.
तूफ़ां नाम का तूफ़ां है
लहरों से टकराए कौन
.
माज़ी माज़ी करें सभी
मुस्तक़बिल चमकाए कौन
.
( मौलिक व अप्रकाशित )

Added by दिनेश कुमार on October 9, 2017 at 6:18am — 20 Comments

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