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Deepak Sharma Kuluvi's Blog – October 2010 Archive (3)

ऐसा हो नहीं सकता

ऐसा हो नहीं सकता



मेरी राख़ को दुनियां वालो

गंगा में ना बहाना

प्रदूषित हो चुकी बहुत

और उसे ना बढ़ाना

करम अगर होंगे अच्छे

तो मिल जाएगी मुक्ति

गंगा जी में बहाने से ही

मुक्ति नहीं मिल सकती

यह है सब बेकार की बातें

ऐसा हो नहीं सकता

किसी के कुकर्मों का अंत

इतना सुखद नहीं हो सकता

गर ऐसा हो जाता

तो हार कोई पापी तर जाता

पाप करने से यहाँ

कोई ना घबराता

कोई ना घबरा----



दीपक शर्मा… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on October 28, 2010 at 5:30pm — 2 Comments

दूर पहाड़ों से आया

मैं दूर पहाड़ों से आया



मैं दूर पहाड़ों से आया

जहाँ सर्द हवाएं बहती हैं

है व्यास पार्वती का संगम

जहाँ यादें मेरी बसती हैं

मेरे अपनें सभी वहीँ हैं

लेकिन मैं हूँ सबसे दूर

यह था किस्मत का लिखा

नहीं किसी का कसूर

ना जानें कब जा पाऊंगा

बापिस उन खूबसूरत फिजाओं में

कोई याद तो करता होगा

मुझको मेरे गाँव में

'दीपक शर्मा' था उस वक़्त मैं

अब हूं 'दीपक कुल्लुवी'

शक्ल-ओ-सूरत बदली,तखल्लुस बदला

लेकिन सीरत ना बदली

लेकिन… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on October 27, 2010 at 11:00am — 3 Comments

क्या लेना

क्या लेना





मुझे मंदिर से क्या लेना

मुझे मस्जिद से क्या लेना

मैं दिल से इबादत करता हूँ

मुझे राम, रहीम संग रहना

मैं गीता पढ़ सकता हूँ

गुरु ग्रन्थ साहिब रट सकता हूँ

कुरान और बाइवल मेरे दिल में बसे

मुझे इन सब के संग रहना

मुझे सियासत नहीं आती

बिलकुल भी नहीं भाती

इक सीधा सदा हूँ इन्सान

मुझे इन्सान बनके ही रहना

में 'दीपक कुल्लुवी' हूँ

मुझे है प्यार दुनिया से

मुझे सबसे मुहब्बत है

मुझे और नहीं कुछ… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on October 1, 2010 at 9:47am — 3 Comments

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