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Satish mapatpuri's Blog – October 2011 Archive (5)

त्यागपत्र (कहानी)

त्यागपत्र (कहानी)

लेखक - सतीश मापतपुरी.

अंक 1 पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करे

.............. अंक -- 2 .....................

राज्य के विधायकों में पी. पी. सिंह का एक अलग ही स्थान था. अपनी स्पष्टवादिता एवं निर्भीकता के लिए वे विख्यात थे.सत्तापक्ष के विधायक होने के बावजूद भी सरकार की गलत नीतियों की आलोचना वे सार्वजनिक रूप में किया…

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Added by satish mapatpuri on October 30, 2011 at 11:30pm — 5 Comments

त्यागपत्र (कहानी)

त्यागपत्र (कहानी)

लेखक - सतीश मापतपुरी

................ अंक -- एक ...................

'प्रबल प्रताप ज़िन्दावाद ' के नारे से पंडाल गूंज उठा. पी. पी.सिंह के नाम से जाने जानेवाले प्रबल प्रताप सिंह के मंत्री बनने के उपलक्ष में इस समारोह का आयोजन हुआ था. जनता - जनार्दन के बीच उनकी अच्छी -खासी लोकप्रियता थी. उनके दर्शनार्थ भीड़ उमड़ पड़ी थी. गिरधरपुर निर्वाचन -क्षेत्र की जनता - जनार्दन को नाज़ था कि वो प्रदेश को एक मंत्री देने का गौरव हासिल करने जा रहे हैं.सच ही तो है…

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Added by satish mapatpuri on October 30, 2011 at 3:00am — 5 Comments

दिवाली का रूप बदल गया

जब से दिल दिवाल हुआ है, दिवाली का रूप बदल गया.

जब से नियति मलिन हुई है, अर्द्धरात्रि में धूप निकल गया.

पर पीड़ा पर होने वाली, धड़कन जानें कहाँ गयी?

संवेदना- चेतना - निष्ठा, मानवता अब कहाँ गयी ?

जब से नफ़रत- क्रोध बसा है, इंसानों का रूप बदल गया.

जब से दिल दिवाल हुआ है, दिवाली का रूप बदल गया.

रीति - रिवाज़ में लोग  बाग. अब छिपकर सेंध लगाते हैं.

पटाखों के बीच, गोलियों का भी शोर मिलाते हैं.

जब से इसका चलन हुआ है, पर्व - त्यौहार का रूप बदल…

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Added by satish mapatpuri on October 26, 2011 at 2:43pm — No Comments

दीपावली हार्दिक शुभकामनाएं

कीजिये कामना सबके अपने मिले.

सबकी आँखों को सुन्दर से सपने मिले.

सारी धरती पे खुशियों की बरसात हो.

ईद का दिन - दिवाली की हर रात हो.

OBO परिवार के सभी सदस्यों को दीपावली हार्दिक शुभकामनाएं.

Added by satish mapatpuri on October 26, 2011 at 2:53am — No Comments

होना चाहिए

 

हुस्न है तो हुस्न का सिंगार होना चाहिए.

 

है किसी से इश्क तो इज़हार होना चाहिए.

 

गर क़यामत आ भी जाए तो भी कोई ग़म नहीं.

 

बस नज़र में खुबसूरत प्यार होना चाहिए.

 

जीतने के बाद गिरगिट सा बदलते रंग जो.

 

उनको वापस लाने का अधिकार होना चाहिए.

 

ताज़ और तख़्त का कब का ज़माना लद गया.

 

आज तो जनहित का ही सरोकार होना चाहिए.

 

चाहते हैं हमसे वो जुड़ना…
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Added by satish mapatpuri on October 25, 2011 at 12:53am — 1 Comment

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