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Zaif's Blog – November 2022 Archive (3)

ग़ज़ल - अभी दुश्मनी में वो शिद्दत नहीं है

122 122 122 122

अभी दुश्मनी में वो शिद्दत नहीं है

हवा को चराग़ों से दिक़्क़त नहीं है

सभी को यहाँ मैं ख़फ़ा कर चुका हूँ

मुझे सच छुपाने की आदत नहीं है

मुझे है बहुत कुछ बताने की चाहत

मगर बात करने की मोहलत नहीं है

किसी से तुझे क्यों मिलेगी मुहब्बत

तुझे जब तुझी से मुहब्बत नहीं है

हक़ीक़त कहूँ तो मैं हूँ ख़ैरियत से

मगर ख़ैरियत में हक़ीक़त नहीं है

मिरे दिल पे तेरी हुक़ूमत है…

Continue

Added by Zaif on November 19, 2022 at 12:07am — 4 Comments

ग़ज़ल (फ़ेलुन बह्र)

(आ. समर सर जी की इस्लाह के बाद)

(22 22 22 22)

सोचा कुछ तो होगा उसने

हमको मुड़कर देखा उसने

कौन वफ़ा करता है ऐसी

सारी उम्र सताया उसने 

जुड़ता कैसे ये टूटा दिल

टुकड़े करके छोड़ा उसने 

जब-जब ज़िक्र-ए-उल्फ़त छेड़ा

तब-तब मुझको टोका उसने 

उसको कौन समझ सकता था

बदला रोज़ मुखौटा उसने 

जिसको सबसे बढ़कर चाहा

छोड़ा मुझको तन्हा उसने 

जाकर वापस…

Continue

Added by Zaif on November 18, 2022 at 7:32pm — 6 Comments

ग़ज़ल (रोटी)

2122 1212 22/112

जितनी क़िस्मत में थी लिखी रोटी

सबको उतनी ही मिल सकी रोटी

मुफ़्लिसी, भूख, दर्द, दुख, आंसू

हां, बहुत कुछ है बोलती रोटी

याद परदेस में भी आती है

मां के हाथों की वो बनी रोटी

ज़ाइक़ा कुछ अलग ही है इनका

वो नमक-मिर्च, वो दही-रोटी

रो रहा है सड़क पे इक बच्चा-

'दो दिनों से नहीं मिली रोटी'

कीं बहुत 'ज़ैफ़' कोशिशें हमने

बन न पाई वो गोल-सी…

Continue

Added by Zaif on November 8, 2022 at 5:30am — 8 Comments

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