For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कोई ऐसा मिला प्यार की राह में

कोई ऐसा मिला प्यार की राह में,
इक नज़र में ही उसपर फ़िदा हो लिए..
क्या कशिश थी उन आंखों में, हम क्या कहें?
देखते ही वो मेरे ख़ुदा हो लिए..
-
उनकी सूरत की जो रोशनी मिल गयी
शायरी के लिए, शायरी मिल गयी.
एक पल में न जाने ये क्या हो गया?
हमको ऐसा लगा हर ख़ुशी मिल गयी.

इस नज़ाकत से उनकी निगाहें झुकीं,
दिल के अहसास सारे फ़ना हो लिए..
(कोई ऐसा मिला प्यार की राह में,
इक नज़र में ही उसपर फ़िदा हो लिए..)
**
शाम ढल-सी गयी, रात होने लगी
फिर अचानक यूँ बरसात होने लगी.
कुछ न उसने कहा, कुछ न हमने सुना,
पर इशारों में हर बात होने लगी.

इस अदा से हमें देख वो हंस दिए,
हम उसी वक़्त ख़ुद से जुदा हो लिए..
(कोई ऐसा मिला प्यार की राह में,
इक नज़र में ही उसपर फ़िदा हो लिए..)
**
जब सुकूँ देने लगती हैं मदहोशियाँ
औ' ज़ुबाँ ने भी रख ली हों ख़ामोशियाँ
पल गुज़रते हैं जब उनकी आग़ोश में,
अच्छी लगती हैं उनकी वो गुस्ताख़ियाँ

बेवजा कट रही थी जो ये ज़िंदगी,
वो उसी ज़िंदगी की वजा हो लिए..
(कोई ऐसा मिला प्यार की राह में,
इक नज़र में ही उसपे फ़िदा हो लिए..)

© मौलिक व अप्रकाशित

Views: 729

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on April 8, 2017 at 11:07am
आदरणीय यमेता जी सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। सादर।
Comment by Zaif on April 7, 2017 at 7:27pm
बेहद शुक्रिया, समर जी एवं राजेश कुमारी जी।
मार्गदर्शन हेतू धन्यवाद।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 7, 2017 at 7:14pm

बहुत सुन्दर नज़्म कही है आद० पुनेठा जी बाकी आद० समर भाई जी की इस्स्लाह काबिले गौर है | आपको बहुत बहुत मुबारकबाद |

Comment by Samar kabeer on April 7, 2017 at 6:22pm
जनाब यमित पुनेथा जी आदाब,काफ़ी समय बाद आपने दर्शन दिये, बहुत उम्दा नज़्म कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
छटे बन्द में 'मदहोशियाँ,'ख़ामोशियाँ'के साथ ''गुस्ताख़ियां'की तुकान्तता सही नहीं है,इसे 'सरगोशियाँ' कर लें तो मुनासिब होगा ।
अपनी रचनाओं से मंच को फैज़याब करते रहें ।
Comment by Zaif on April 7, 2017 at 3:07pm
आ. आरिफ़ जी, रवि जी धन्यवाद!
इसका शीर्षक है - "कोई ऐसा मिला प्यार की राह में"

ये रचना मैंने (2122 1221 2212) बह्र पर कहने की कोशिश की है। कृपया मार्गदर्शन करें।
Comment by Ravi Shukla on April 7, 2017 at 1:26pm

आदरणीय यमित जी नमस्‍कार ओ बी ओ में आपका स्‍वागत है आदरणीय मोहम्‍मद आरिफ जी ने सहा कहा है रचना की विधा और उसका मात्रिक विधान रचना से पूर्व लिखना अो बी ओ का अनुशासन है जिससे पाठको को उसकी जानकारी हो सके । रचना प्रस्‍तुत करने के लिये बधाई । जिस विधा पर आप काम करना चाहते है उससे संंबंधित ग्रुप मख्‍य पृष्‍ठ पर उपलब्‍ध है आनी रुचि के अनुसार उसको ज्‍वाईन करें और संभावनाओं का अथाह सागर आपके सामने खुल जाएगा । सादर

Comment by Mohammed Arif on April 7, 2017 at 12:40pm
आदरणीय यमित पुनेथा जी आदाब, आपकी रचना से मेरा पहला साक्षात है ।शायद आप ओबीओ मंच से अभी-अभी जुड़े हैं । सर्वप्रथम ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है । आपने रचना का शीर्षक नहीं लिखा है । शायद आप मुक्तक कहना चाहते हैं । मुक्तक के शैल्पिक सौष्ठव की निगाह से देखे तो आपके मुक्तक मात्रिक विधान में नहीं है । इनको सही बह्र में लिखना होगा । आगामी मार्गदर्शन गुणीजन देंगे । ओबीओ मंच में शामिल होने के लिए आपको बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service