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Manoj kumar shrivastava's Blog – December 2017 Archive (5)

देशभक्ति का मजा

क्रांतिकारियों ने क्या-क्या सहा होगा,

देशभक्ति का मजा जाने कैसा रहा होगा,

मेरे वीरों का जब लहू बहा होगा,

पवित्र खून से चाबुक धन्य हुआ होगा,

फिरंगियों को भगत ने

दौड़ा-दोड़ा कर कूटा होगा,

बिस्मिल ने भी खजाना

मजे से लूटा होगा,

तो आजाद ने भी जंगल में,

योजना बनाई होगी,

और आजादी पाने वीरों ने,

खूनी होली मनाई होगी,

हथियार लूटने का मजा भी,

अलग रहा होगा,

गरमदल को देख,

ब्रिटिश का पसीना बहा होगा,

गांधी के भी अपने,

ठाठ रहे…

Continue

Added by Manoj kumar shrivastava on December 22, 2017 at 9:46pm — 8 Comments

सुंदरता का अहंकार

एक अहंकारी पुष्प

अपनी प्रसिद्धि पर इतरा रहा है,

भॅंवरों का दल भी,

उस पर मंडरा रहा है,

निश्चित ही वह,

राग-रंग-उन्माद में,

झूल गया है,

स्व-अस्तित्व का,

कारण ही भूल गया है,

तभी तो,

बार-बार अवहेलना,

कर रहा है,

उस माली की,

जिसने उसे सुंदरता के,

मुकाम तक पहुचाया,

संभवतः उसे ज्ञात नहीं,

बयारों ने भी,

करवट बदल ली है,

जो संकेत है,

बसंत की समाप्ति…

Continue

Added by Manoj kumar shrivastava on December 18, 2017 at 7:30pm — 12 Comments

निःशब्द देशभक्त

जब एक सैनिक शहीद होता है

तो साथ में शहीद होती हैं

ढेर सारी उम्मीदें,

ताकत और भावनाएं,

मैं सैनिक नहीं 

न मेरा कोई पुत्र,

पर पूरी देशभक्ति

निभायी

अपनी चहारदीवारी

के भीतर

हाथ में धारित

मोबाईल पर चल रहे

सोशल मीडिया

में शहीद सैनिक

की फोटो पर

"जय हिंद"

लिख कर और

सो गया, तब

रात स्वप्न में

वह शहीद आया,

कहा- मैं अपनी

मिट्टी और आपकी

और सेवा करना

चाह रहा था,

पर कर न पाया,

इसलिए…

Continue

Added by Manoj kumar shrivastava on December 13, 2017 at 2:30pm — 9 Comments

मैं भी कवि-सम्मेलन में जाता हॅूं

मैं कवि-सम्मेलन में जाता हॅूं,

मैं भी कवि-सम्मेलन में जाता हॅूं,

भेद-भाव के दरया को,

पाटने की कोशिश  में,

सूरज के घर में चाॅंद का,

संदेशा  लेकर जाता हॅूं, हाॅं,

मैं भी कवि-सम्मेलन में जाता हॅूं।

खुशियों को ढ़ूंढ़ने निकला हॅूं,

मिल भी गयी दुखदायी खुशी,

दुखदायी खुशी के चक्कर में,

हसीन गम को भूल जाता हॅूं।, हाॅं,

मैं भी कवि-सम्मेलन में जाता हॅूं।

ऐशो-आराम की जिंदगी मिली है,

आराम से सोता पर क्या करूॅं,

पहले हजारों अर्धनिद्रा से…

Continue

Added by Manoj kumar shrivastava on December 3, 2017 at 1:00pm — 4 Comments

देशभक्त तो पैदा कर

दलगत राजनीति से दूर होना चाहिए,

देशहित करने का सुरूर होना चाहिए,

बेशक विचारों में भेद हो सकता है,

पर राष्ट्रहित हो तो गुरूर होना चाहिए,

सत्ता से प्रेम और विपक्ष से गिला नहीं,

किसी दल से भी मैं कभी मिला नहीं,

पर प्रबलता से देशहित में कहता हूँ,

जो देश का है, मैं उसकी पार्टी में रहता हूँ,

और जो भी विपक्षी हो, उससे कहता हूँ,

मतदाता से नहीं, देश से वायदा कर,

मैं सिर्फ तुझे ही सत्ता में चुनूँगा पहले,

पहले अपनी पार्टी में देशभक्त तो पैदा… Continue

Added by Manoj kumar shrivastava on December 2, 2017 at 8:41am — 8 Comments

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