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सुंदरता का अहंकार

एक अहंकारी पुष्प

अपनी प्रसिद्धि पर इतरा रहा है,

भॅंवरों का दल भी,

उस पर मंडरा रहा है,

निश्चित ही वह,

राग-रंग-उन्माद में,

झूल गया है,

स्व-अस्तित्व का,

कारण ही भूल गया है,

तभी तो,

बार-बार अवहेलना,

कर रहा है,

उस माली की,

जिसने उसे सुंदरता के,

मुकाम तक पहुचाया,

संभवतः उसे ज्ञात नहीं,

बयारों ने भी,

करवट बदल ली है,

जो संकेत है,

बसंत की समाप्ति का। 

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Manoj kumar shrivastava on December 21, 2017 at 3:36pm

आदरणीय मुसाफिर जी, सादर अभिवादन। मेरा कोटिशः आभार स्वीकार करें।

Comment by Manoj kumar shrivastava on December 21, 2017 at 3:35pm

आदरणीया कल्पना जी सादर नमस्कार। उत्साहवर्धन हेतु आपका कोटिशः आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 21, 2017 at 6:27am

वर्तमान राजनीतिक परिदृष्य पर चोट करती अच्छी प्रस्तुति । हार्दिक बधाई ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on December 20, 2017 at 6:51pm

सुंदर अभिव्यक्ति | हार्दिक बधाई |

Comment by Manoj kumar shrivastava on December 20, 2017 at 8:24am

आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर आभार स्वीकार कीजिए।

Comment by Manoj kumar shrivastava on December 20, 2017 at 8:23am

आदरणीय कुशक्षत्रप जी सादर अभिवादन। अपना स्नेह बनाये रखिएगा। सादर आभार

Comment by Manoj kumar shrivastava on December 20, 2017 at 8:21am

आदरणीय दादा समर कबीर जी सादर नमस्कार, आपके मार्गदर्शन के लिए सादर आभार, अपना स्नेह बनाए रखें। धन्यवाद

Comment by Manoj kumar shrivastava on December 20, 2017 at 8:19am

आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी हृदयतल से आभाार स्वीकार कीजिए

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 19, 2017 at 9:24pm

आदरणीय नोज कुमार जी उम्दा अभिव्यक्ति. हार्दिक बधाई 

Comment by नाथ सोनांचली on December 19, 2017 at 6:33pm

आद0 मनोज कुमार अहसास जी सादर अभिवादन। पुष्य को बिम्बित कर बेहतरीन कविता कही आपने। कोटिश बधाइयाँ। आद0 समर कबीर साहब के बातों का संज्ञान लीजियेगा। सादर

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