For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog – December 2015 Archive (4)

कविता के मर जाने तक

उस दिन जब हम मिले थे 

पहली बार

हम चुप रहे

या यूँ कहो बोल ही न सके

और फिर यूँ ही मिलते रहे

तब तक  

जब तक तुमने शुरु नही किया

बोलना

हालांकि मैं 

बोल न सकी फिर भी

अधर थरथराये जरूर

पर खोल न सकी मुख

पर तुमने जब शुरू किया

तो जाने कहाँ से

शब्दों का समंदर उमड़ पड़ा  

और मैं

उसके घात-प्रतिघात के बीच

खाती रहे हिचकोले

मंत्र-मुग्ध, आतुर, विह्वल  

 

मैं जानती…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 30, 2015 at 4:37pm — 4 Comments

निन्यानबे के फेर में

निन्यानबे के फेर में

हूँ मैं  

लोग देखते है मुझे

ईर्ष्या से या हिकारत से

क्योंकि वे जानते हैं

केवल और केवल एक मुहावरा 

मानव की कमजोर वृत्ति का

धन संचय की उत्कट प्रवृत्ति का

उन्हें यह  पता ही नहीं कि

मुहावरे के पीछे होता है

कोई चिरंतन सत्य या एक इतिहास  

और बहुत सारे मायने

वे सोचते भी नहीं

कि निन्यानबे वे वैशिष्ट्य भी हैं  

जिनके आधार पर  उस ऊपर वाले के है

निन्यानबे…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 26, 2015 at 12:00pm — 8 Comments

वह रहस

आदम फितरत है

भई

राम ने आसन्न -प्रसूता

को छोड़ दिया वन में

जीने, भटकने या  मरने 

भला हो वाल्मीकि का --- I

और कुछ ऐसा ही किया

कृष्ण ने राधा के साथ

छोड़ दिया निराश्रित

जीने, भटकने या मरने I

सीता का अंत तो जानते है सभी

इसी माटी में दफ़न हुयी थी कभी

पर राधा ------?

कब तक तकती रही राह ?

भेजती रही पाती और सन्देश

फिर कहाँ गयी वह ?

कैसे हुआ उसका अंत ?

किसी ने भी याद नही रखा

लानत…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 16, 2015 at 7:19pm — 2 Comments

अभिलाषा जाग रही

सूने आंगन में जाल बिछा चांदनी रात सोयी रोकर

मेरी अभिलाषा जाग रही रागायित हो पागल होकर

मैं समय काटता रहा विकल

दायें-बायें  करवटें   बदल

घिर आये मानस-अम्बर पर

स्वर्णिम सपनीले बादल-दल

बौराया घूम रहा मारुत अपनी सब शीतलता खोकर  

सपनो में चल घुटनों के बल

सरिता तट पर आया था जब

कह डाला कुछ मन की मैंने

वह बज्र प्रहार हुआ था तब

सायक सा टूटा था अंतस निर्दयता  की खाकर ठोकर  

 यह नाग आँख में है अविरल

छोड़ता निरंतर…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 10, 2015 at 8:30pm — 5 Comments

Monthly Archives

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओबीओ से पिछले बारह साल से जुड़ी हूँ। इसके बंद हो जाने की बात से मन भारी हो रहा है।मेरे कच्चे-पक्के…"
15 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सादर,           जब ऐसा लगता था धीरे-धीरे सभी नियमित सदस्यों के पास…"
18 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जिस प्रकार हम लाइव तरही मुशायरा, चित्र से काव्य तक, obo लाइव महा उत्सव इत्यादि का आयोजन करते हैं…"
yesterday
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"मैं लगभग 10 वर्ष पहले इस मंच से जुड़ा, बहुत कुछ सीखने को मिला। पारिवारिक व्यस्तता के कारण लगभग सोशल…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर हमारे समूह में कोई व्यवसायी हैं और उनके पास कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड्स हों तो वे इसके…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सदस्यों में रुचि के अभाव ने इसे बंद करने के विचार का सूत्रपात किया है। ऐसा लगने लगा था कि मंच को…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" एक दुखद स्थिति बन रही है. लेकिन यह नई नहीं है. जब आत्मीयजनों और ओबीओ के समृद्ध सदस्यों की…"
yesterday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"मै मंच के प्रारंभिक दिनों से ही जुड़ा हुआ हूं। इसका बंद होना बहुत दुखद होगा। मुझे लगता है कि कुछ…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय गणेश जी, जितना कष्ट आपको यह सूचना देते हुए हो रहा है, उतना ही कष्ट हम सब को यह सुनने में हो…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दु:खद "
yesterday
Admin posted a discussion

अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....

प्रिय सदस्य गण / प्रबंधन समिति के सदस्य गण / ओ बी ओ के सभी पाठक एवं शुभचिंतक गणसादर प्रणामआप सभी…See More
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service