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Kiran Arya's Blog (5)

मेरे हमसफ़र

उदास सी थी वो सहर

खामोश स्तब्ध शाम थी

हवा भी कुछ रुकी सी थी

राहों की वो विरानियाँ

आँख में गई ठहर.....



एहसासों की एक लहर

यादों के नर्म बिछोने सी

विरह के लिए खिलोने सी

इश्क की रवानियाँ

रूह को सहलाए हर पहर.....



नदी से निकले एक नहर

अपनी ही धुन में बहती सी

विरक्ति को हाँ सहती सी

छोड़ गई निशानियाँ

दर्द बन गया जहर......



तुझ बिन सूना दिल का शहर

पलकें नम झुकी सी थी

आहटें खटकती सी थी …

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Added by Kiran Arya on December 11, 2013 at 2:30pm — 1 Comment

मेरे कुछ दोहे

१.

मात पिता तो बोझ सम, आपन पूत सुहाय ।

जियबे पर ...पानी नही, मरे गया लइ जाय ॥

२.

धूल संस्कृति फाँकती, ....संस्कार हैं रोय ।

अंधी दौड़ विकास की, मानो सबकुछ होय॥

३.

है विवेक तो तनिक नहिं, शब्दन की भरमार।

अधकचरा से ज्ञान पर,...... हिला रहे संसार॥

४.

ज्ञान समुन्दर उर बसै, फिर भी भटकय जीव।

मन ना बस में करि सकै, ..तन जैसे निर्जीव॥

५.

देख मनुष का गर्व यों, ..सोच रहे भगवान ।

धरा नरक बन जाय जो, सारे होयँ समान…

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Added by Kiran Arya on December 9, 2013 at 1:00pm — 17 Comments

आस की कश्तियाँ

मायूसियों ने आज फिर दस्तक दी

खयालो के बंद दरवाजो से निकल

मन के आँगन में बिखरने को

बेताब सी मायूसियाँ

लेकिन आस की एक लौ

जिससे रोशन है दिल की बस्तियाँ

मुस्कुरा के बोली बुझने ना देना मुझे

जीवन में आयेंगे कठोर थपेड़े

वक़्त की आंधियों में

हमने मिटती देखी हैं

इन थपेड़ो की गिरफ्त में कई हस्तियाँ

जिंदगी की उलझनों से…

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Added by Kiran Arya on September 13, 2012 at 1:30pm — 20 Comments

दिल मेरा

हमको यह गुमा था की हम है दिलो के खरेदार…

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Added by Kiran Arya on January 20, 2012 at 3:19pm — 4 Comments

आजमाइश

तुम्हारी हर आजमाइश के आगे हम सर झुकाते चले गए

सोचा यह आजमाइश ही सच्चे प्रेम की निशानी है

इक आजमाइश पर उतरकर खरे खुश होने से पहले ही

तुम एक और आजमाइश संग खड़े मुस्काते नज़र आये

हम फिर जुट गए उस पर खरा उतरने की जुगत में

जब होने लगा यकीन तुम्हे प्यार पे मेरे आजमयिशो से परे

तुम लगे सोचने ख़त्म करने को सिलसिला आवाजाही का

तब तक मन का जीव मुक्त हो चुका था हर आजमाइश से

और सिर्फ खुली हुई आंखें मेरी रह गई बैचैनी का मंज़र लिए

पूछती एक ही ही…

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Added by Kiran Arya on January 17, 2012 at 10:59am — 5 Comments

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