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किशन कुमार "आजाद"'s Blog (3)

मुआवजा (लघु कथा)

"रमलू की घरवाली कौन हैं ? "

"साब मैं हूँ । "

"हम तेरे पति की मौत पर सरकार की तरफ से मुआवजा देने आये हैं, पढना जानती हैं ? "

"जी नही साब, अनपढ़ हूँ । "

"और कौन -कौन है घर में ? "

"साब मैं, 4 छोरिया 1 बेटो है। रमलू तो मर गयो । ये सारो बोझ मारे ऊपर छोड़ गयो । घर की हालत तो थे देख ही रया हो, खाने के लाले है। साब इतनी सर्दी में भी पहनने को कुछ नही ..." सिसकने लगती है ।

"चल ठीक है, रो मत ये......"

" इक मिनट " बात पूरी भी नही हुई थी की सहायक के कान मेँ वो…

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Added by किशन कुमार "आजाद" on November 22, 2014 at 8:30am — 8 Comments

ताना

"ममी बिस्कुट "22 महीने की उस बच्ची ने तुतलाती आवाज में कहा ।

माँ के बोलने से पहले ही दादी चीखी

" हाँ खिला न बिस्कुट यहा तो तेरे बाप ने पैसे रखे है । 3 बेटियाँ पैदा कर दी । अब तो जिन्दगी भर खिलाना ही है कुतिया कही की ...."

"माँजी गाली मत दो"

"अरे कलमुँही बकरी की तरह लडकियों की रेवड फेला दी और मुझसे जबान लड़ाती है । "

"बच्चे तो भगवान की देन है "

"तो उसी भगवन से इक बेटा क्यों न ले आई ।"

शाम को

"अरी ओ अभागन ! कमरे में मर गई क्या ? इन बकरियों की मेमे को तो बंद… Continue

Added by किशन कुमार "आजाद" on October 29, 2014 at 6:30am — 6 Comments

खिलौना (लघुकथा)

'माँ क्या दूल्हा बाजार में बिकता है? जिसे दहेज देकर खरीदने के लिए तू पेसे जोड़ रही है ।'
' मगर बेटा में तो तेरे लिए ...'
'माँ मुझे पति चाहिए कोई दहेज लेकर बिका हुआ खिलौना नही ।'


मोलिक व अप्रकाशित
किशन 21-10-14

Added by किशन कुमार "आजाद" on October 20, 2014 at 10:50pm — 3 Comments

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