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Seemahari sharma's Blog – July 2014 Archive (1)

दोहे।

दिनकर मनमाना हुआ, गई धरा जब ऊब।

सूर्य रश्मियाँ रोक के, ......मेघा बरसे खूब।



त्राही दुनियां में मची, संकट में सब जीव।

बरखा रानी आ गई, .....कहे पपीहा पीव।



झूम रहे पत्ते सभी, पवन गा रही गीत।

वन्दन बरखा का करें, निभा रहें हैं रीत।



रंग धरा के खिल गए, शीतल पड़ी फुहार।

वन कानन नन्दन हुए , झूम उठा संसार।



पुष्प सभी हैं खिल उठे, जल की पड़ी फुहार।

भ्रमरों ने गुंजन किया, तितली ने मनुहार।



जल निमग्न धरती हुई, जन जीवन फिर…

Continue

Added by seemahari sharma on July 29, 2014 at 10:30am — 10 Comments

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