For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Manan Kumar singh's Blog – July 2018 Archive (1)

प्रजातंत्र(लघुकथा)



'एक सेठ के पाँच पुत्र थे, दो खूब पढ़े-लिखे,एक कुछ-कुछ पढ़ा हुआ और शेष दो के लिए काला अक्षर भैंस बराबर था।सेठ के मरते समय की बात के अनुसार घर की मिल्कियत(मालिकाना हक) साल भर के लिए पाँचों भाइयों में से सर्वसम्मति से या बहुमत से चुने हुए एक भाई को सौंप दी जाती।वह घर का कामकाज देखता,अपने हिसाब से विभिन्न मदों में धन खर्च करता।कभी पहला पढ़ा-लिखा भाई मालिक होता,तो कभी दूसरा।बीच-बीच में तीसरा कम पढ़ा लिखा भी मालिक बन जाता,अन्य दो अँगूठाछाप भाइयों की मदद से।पर उसकी कुछ चल नहीं पाती।ढुलमुल रवैये…

Continue

Added by Manan Kumar singh on July 8, 2018 at 8:30am — 6 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"//इनमें कोई न समझदार ख़ुदा खैर करे' क्या यह कर सकते हैं// इस मिसरे को यूँ कर सकती…"
1 hour ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post छुड़ाना है कभी मुमकिन बशर का ग़म से दामन क्या ? (७० )
"स्नेहिल सराहना के लिए हार्दिक आभार भाई Ram Ashery जी , सादर नमन    "
2 hours ago
Ram Ashery commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post छुड़ाना है कभी मुमकिन बशर का ग़म से दामन क्या ? (७० )
"अति सुंदर रचना के लिए आपको बहुत बहित बधाई स्वीकार हो "
2 hours ago
Usha Awasthi commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"आदाब, इस खूबसूरत ग़ज़ल हेतु आपको हार्दिक बधाई एवं समस्त ओ बी ओ परिवार को सालगिरह की बहुत-बहुत…"
2 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर ग़ज़ल तक आने तथा अपना क़ीमती वक़्त देने के लिए बहुत बहुत आभारी हूँ। सर, आपकी…"
3 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"हार्दिक आभार  Salik Ganvir जी "
4 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"आदरणीय समर कबीर साहिब, सादर प्रणाम। आपने ओ बी ओ को दसवीं सालगिरह पर बेहद ख़ूबसूरत तुहफ़ा दिया है, और…"
5 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ख़ुदा ख़ैर करे (ग़ज़ल)
"आदरणीय योगराज प्रभाकर साहिब, सादर नमन। मेरी इस ग़ज़ल को फ़ीचर ब्लॉग में शामिल करने के लिए आपका…"
5 hours ago
Salik Ganvir commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)
"भाई गहलोत जी. एक और अच्छी ग़ज़ल पोस्ट करने के हार्दिक बधाइयाँ स्वीकारें"
5 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर है(७८)

(1212 1122 1212  22 /112 )यक़ीं के साथ तेरा सब्र इम्तिहाँ पर हैहयात जैसे बशर लग रही सिनाँ पर…See More
7 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सम्पूर्ण ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार को दसवीं वर्षगाँठ की  हार्दिक शुभकामनाएँ"
15 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"सच बहुत ही मुँह लगा है ओ बी ओ हाँ समर जी का नशा है ओ बी ओ   सच कहा है “देख लो दिल चीर…"
16 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service