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हिंदी की हकीकत(लघु कथा)

हिंदी की हकीकत
*****
विभाग(संस्था) में राजभाषा के कार्यान्वयन की समीक्षा का कार्यक्रम चल रहा था। बुलाया तो सभी अधीनस्थ विभागों के आला अधिकारियों को गया था।पर कुछ विभागों से जरा उच्च पदस्थ अधिकारियों को छोड़ दिया जाय,तो शेष विभागों से कुछ कम वरीय अधिकारी ही उपस्थित हुए थे।किसी विभाग का कार्यकलाप पूर्व में रिपोर्ट किये गए स्तर से बेहतर था,तो किसीका ले देकर यथावत।यथोचित टिप्पणियाँ प्रेषित की जा रही थीं।राजभाषा में किये गए अच्छे कार्यों की सराहना के शब्द उच्चरित हो रहे थे।यथाक्रम एक विभाग की बारी आई।उस विभाग के थोड़े उच्च अधिकारी तशरीफ़ लाये हुए थे।कार्यकलाप जरा पिछड़ा-सा पाया गया।कारपोरेट अधिकारी,जो सभा की अध्यक्षता कर रहे थे,ने उक्त अधिकारी से बात शुरू की।वही उस विभाग में राजभाषा की दयनीय दशा का कारण जानने के लिए।
-कुछ खास कारण है क्या?
-नो सर,नॉट ऐट ऑल', उस विभाग के अधिकारी ने जबाब ठोका।वे शायद गैर हिंदी भाषी प्रदेश से थे।
-वेल,वी विल अचीव.....',कारपोरेट अधिकारी बोले।
-या सर,व्हाई नॉट?' एक अन्य विभाग का स्वर गूँजा।वे हिंदी भाषी क्षेत्र के लग रहे थे।उन्होंने कोशिश कर अंग्रेजी में सुर मिलाया था।
-वेल,मुझे जरा दूसरी मीटिंग में जाना है।वेल विशेश!'कारपोरेट अधिकारी चलने लगे।उपस्थित लोगों ने उठकर उनका अभिवादन किया।फिर थोड़ी देर बाद धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा संपन्न घोषित हुई।हिंदी खुद को तलाश रही थी।
"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Manan Kumar singh on September 14, 2017 at 6:26pm
बहुत बहुत आभार आदरणीय समर जी।तो फिर राजभाषा क्या है?
Comment by Samar kabeer on September 14, 2017 at 6:09pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,हिन्दी दिवस पर,हिन्दी की दशा दिखाने का अच्छा प्रयास किया है आपने,लेकिन आप जो कहना चाहते हैं उसमें कुछ और कसावट होना थी,ख़ैर इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
एक बात ये कि हिन्दी भाषा को भारत में सरकारी तौर पर राजभाषा तस्लीम नहीं किया गया है ।
Comment by Manan Kumar singh on September 14, 2017 at 5:50pm
आदरणीय अफरोज जी,आपका बहुत बहुत शुक्रिया!
Comment by Manan Kumar singh on September 14, 2017 at 5:49pm
आदरणीया कल्पना जी,सादर आभार!
Comment by Manan Kumar singh on September 14, 2017 at 5:48pm
बहुत बहुत आभारी हूँ ,मिश्र जी।
Comment by Afroz 'sahr' on September 14, 2017 at 4:31pm
आदरणीय मनन जी दिल को छू गई आपकी लघु कथा!नि:संदेह आपका लिखना सार्थक हुआ!मेंरी और से हार्दिक बधाई!
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 14, 2017 at 4:09pm

हिंदी खुद को तलाश रही थी | आदरणीय सटीक बात कही है , हार्दिक बधाई आपको इस लघुकथा के लिए |

Comment by Mohit mishra (mukt) on September 14, 2017 at 11:23am

हकीकत को जीवंत करती सार्थक रचना। बधाई 

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