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22 22 22 22
तंज कसे फिर हाथ हिलाये।
लगता खुद पर ही पछताये।1

हाथ मिलाना,ख़ंजर लेकर,
यह चीनी लहजा कहलाये।2

बेमतलब का घुसपैठी बन
अरुणाचल पर आँख गड़ाये।3

बासठ बासठ करता रहता
सतरह में वह पीठ दिखाये।4

भारत के अंदर वह अपने
देश बने सामां बिकवाये।5

'आतंकी सब ढ़ेर करेंगे',
कह लेता,फिर फिर सहलाये।6

पाँच दिशा के दोस्त बुलाकर(ब्रिक देश)
अपना ही बाजा बजवाये।7

भूल गया सब चाल-बिसातें
पाँच सुरों का गाना गाये।8(पंचशील)

अपना भारत धीर धनुर्धर
पुतली-पुतली नैन गड़ाये।9

नाटे-चिपटे मुँह के बल हों,
जो चीनी होली जल जाये।10

आवाहन की आज घड़ी है
भारत-भारत हर जन गाये।11
@"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Manan Kumar singh on September 14, 2017 at 7:55am
आदरणीय गिरिराज भाई,आभारी हूँ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 13, 2017 at 9:07pm

आ. मनन भाई , वर्तमान पर बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Manan Kumar singh on September 11, 2017 at 8:45pm
आदरणीय महेंद्र जी,आपका बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by Mahendra Kumar on September 11, 2017 at 8:00pm

अच्छी मुसलसल ग़ज़ल है आ. मनन जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Manan Kumar singh on September 11, 2017 at 8:38am
बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by SALIM RAZA REWA on September 11, 2017 at 8:09am
मनन जी रचना के लिए बधाई,
Comment by Manan Kumar singh on September 10, 2017 at 8:06pm
आदरणीय आरिफ जी,शुक्रिया।
Comment by Manan Kumar singh on September 10, 2017 at 8:04pm
आदरणीय समर जी,आभार एवं नमन।
Comment by Samar kabeer on September 10, 2017 at 6:11pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,चीन से ख़िताब करती अच्छी ग़ज़ल कही है,बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on September 10, 2017 at 4:23pm
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब, चीन को केंद्र में रखकर बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने । इस हेतु दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

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