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हिंदी गजल/गीतिका(टूटता रहता घरौंदा...)

#गीतिका#
***
टूटता रहता घरौंदा फिर बनाना चाहिये
जोड़कर कड़ियाँ जरा-सा गीत गाना चाहिये।1

जिंदगी से दर्द का बंधन बड़ा मशहूर है
जब समय थोड़ा मिले तो मुस्कुराना चाहिये।2

तीर ये कबके सँजोये चल रहे हैं आजतक
बात पहले की भुला नजदीक आना चाहिये।3

आदमी को आदमी के दर्द का अहसास हो
बस हवा ऐसी बहा गंगा नहाना चाहिये।4

मिल रहीं नजरें यहाँ परवान पन चढ़ता नहीं
आपके दिल में जरा मुझको ठिकाना चाहिये।5

फूल छितराये नहीं ऐसी करूँ मैं कामना
पंखुड़ी का मोल घर-घर को बताना चाहिए।6

नाव है मझधार में पर कूल कितनी दूर है?
अब पलक झपके नहीं चप्पू चलाना चाहिये।7
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

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Comment by Manan Kumar singh on October 20, 2016 at 11:35am
आपकी सलाह का सर्वदा स्वागत है, आदरणीय।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 20, 2016 at 9:50am

आपने समझा दिया आदरणीय तो मैं समझूँगा ही। आगे से बचने की कोशिश भी करूँगा। 

सादर

Comment by Manan Kumar singh on October 20, 2016 at 9:05am
आदरणीय सैरभ जी, सलाह के लिए शुक्रिया।हाँ, गंगा नहाना पुण्य का काम भी होता है,ऐसी भी समझ आप रख सकते हैं;शायद भाव-संप्रेषण में कोई बाधा न हो,सादर।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 20, 2016 at 4:33am

प्रयास के लिए हार्दिक बधाइयाँ आदरणीय 

गंगा नहाना चाहिये - गंगा नहाना एक मशहूर मुहावरा है. इसका गलत अर्थों में प्रयोग हुआ है. गंगा नहाना का भाव समर्थित शाब्दिक अर्थ होता है पीछा छुड़ाना या जान बचाना. इस हिसाब से इस मुहावरे का प्रयोग देखें. अगर मुहावरे के रूप में प्रयोग नहीं हुआ है तो फिर इस तरह के वाक्यांशों से बचना चाहिए जो किसी लोकोक्ति या कहावत के रूप में रूढ़ हो चुके हैं.

फिर, हिम्मत दिखाना चाहिए - हिम्मत स्त्रीलिंग शब्द होने से क्रिया दिखानी हो जायेगी. आप उर्दू भाषा की ग़ज़ल नहीं कह रहे हैं इतना तय है.

वैसे काफ़िया कइयों को त्रुटिपूर्ण लग सकता है. लेकिन आपने प्रयोग किया है तो इसकी समझ भी रखें. 

बाकी, प्रयास अच्छा है.

शुभ-शुभ

Comment by Manan Kumar singh on October 19, 2016 at 9:28pm
आदरणीय गिरिराज आभार आपका! पन यानि वचन/प्रतिग्या.......

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 19, 2016 at 8:33pm

आदरणीय मनन भाई , बहुत अच्छी गज़ल हुई है , दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ।

परवान पन    ---  पन , मै समझ नही पाया   कही आप - परवान  पर चढ़ता नही तो नही कहना चाहते  ?

Comment by Manan Kumar singh on October 19, 2016 at 6:22pm
आभार आगरणीय शकूर जी!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 19, 2016 at 10:42am

अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. मनन कुमार सिंह जी बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

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