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M Vijish kumar's Blog (11)

गीत - ऐतबार

गीत - ऐतबार

ना करना तू ऐतबार प्यार मे,

बस धोखे ही धोखे हैं इस प्यार मे,

मैने दिया था तुमको ये दिल, करना चाहूँ तुम्हे हासिल,

बदला तूने जो अपना इरादा, तोड़ा तूने क्यूँ अपना ये वादा.

1} जबसे रूठ के मुझसे तुम…

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Added by M Vijish kumar on February 18, 2018 at 2:00pm — No Comments

गीत - आरज़ू

गीत - आरज़ू

अंजाने से सपने, अंजानी राह है,

पाना है तुझको ही, यह मेरी चाह है,

तेरे बिना ऐसे कैसे मैं जियुं,

चाहता हूँ साथ तेरे मैं रहूँ,

पूरी कर दे तू मेरी यह आरज़ू,

पूरी कर दे तू…

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Added by M Vijish kumar on January 27, 2018 at 8:18pm — 4 Comments

गीत - तुझे देखूँ यहाँ वहाँ

संदेसा तेरे दिल का , धड़कने है लातीं,

सवार तेरे धुन मे, खुद को कहाँ रोक पाते,

बस मुस्कुरकर तू देख लेती ज़रा,

दिल क्या, जान भी तेरे हो जाते,

तुझे देखूँ यहाँ वहाँ, ढूँढूँ मैं सारा जहाँ, 

बाहों से लगा लूँ तुझे, दिल मे बसा लूँ तुझे....(2)…

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Added by M Vijish kumar on October 7, 2017 at 7:30pm — 7 Comments

कविता - " क्यूँ किया तूने "

आशिक़ तू आशिक़ी से पहले, करना ज़रूर गौर,

इश्क़ की राह मे आया है नया दौर,

हाथो मे हाथ लिए निकले तो थे,

हमराह बनकर भी तू, चला गया कहीं और.

क्यूँ किया तूने, ये तू क्या कर गई,

बिना कुछ किए ही मेरी जान ले गई....

लफ़्ज़ों की एहमियत को, तू ना समझ पाया,

जाने के बाद मेरे, मैं तुझे याद आया,

की थी क्या ख़ाता मैने, जो तूने था मुंह मोड़ा,

काँच से भी बदतर, तूने दिल मेरा है तोड़ा.

क्यूँ किया तूने, ये तू क्या कर गई,

बिना कुछ किए ही मेरी जान ले…

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Added by M Vijish kumar on March 9, 2017 at 10:00am — 2 Comments

गीत – सवेरा तू है लाती....

आहिस्ता – आहिस्ता, पास तू आने लगी,

बाहों मे आकर, दिल मे समाने लगी,

छूकर मुझको, सपना दिखाने लगी,

नींदों मे आकर, तू अब सताने लगी.

सवेरा तू है लाती, तू ही लाती रात है,

मेरे दिल को जो धड़कादे , तुझमे वही बात है....(2)



1} देदूं मैं…

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Added by M Vijish kumar on December 28, 2016 at 8:30am — 8 Comments

गीत - दिए जो तूने मुझको गम

दिए जो तूने मुझको गम,

हुए जुदा खुद से हम,

रुख़ ये तूने मोड़ा क्यूँ,

दिल मेरा तोड़ा क्यूँ...

तेरी यादों मे जिया, ज़ख़्म दिल का है सिया,

तेरी यादों मे जिया, ज़ख़्म दिल का है सिया,

आँखों से बहते रहे अश्क, दर्द का प्याला पिया....

दिए जो तूने मुझको गम,

हुए जुदा खुद से हम....

बातें तेरी अनकही,

पास तू भी है नही,

बातें तेरी अनकही,

पास तू भी है नही,

करले कुछ वक़्त यार तू अब, प्यार झूठा ही सही....

दिए जो तूने मुझको…

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Added by M Vijish kumar on June 16, 2016 at 9:30am — No Comments

गीत - तू ही रे

तू ही रे.....तू ही रे.....

मेरे दिल मे है समाया,

तू ही रे....

तुझे दिल मे है बसाया,

तू ही रे....

1}एक तू ही तो दुआ थी,एक तू ही थी मंज़िल,

तुझसे शुरू मेरी राहें, मेरा हर पल तुझमे शामिल,

इतना बेसूध हुआ मैं, पाने को प्यार तेरा,

तेरी रज़ा तेरी कुरबत,बस इंतेज़ार है तेरा.

तू ही रे.....तू ही रे.....

.

जादू था तेरी नज़र मे, हुआ पागल मैं दीवाना,

तेरी मदहोश सी अदा ने, किया दिल को आशिकाना,

बंदिशों की है ना परवाह, ना…

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Added by M Vijish kumar on June 10, 2016 at 4:00pm — 2 Comments

कविता - " तेरा-मेरा "

)

जन्नत से आगे इक जहान तेरा…

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Added by M Vijish kumar on June 9, 2016 at 10:30am — 6 Comments

कविता - " क्या ऐसा भी कोई मंज़र होगा "

जब रातें होंगी अधूरी सी ,

न बातें होंगी पूरी सी ,

न हाथों में हाथ होगा ,

न तेरा मेरा साथ होगा ,

क्या ऐसा भी कोई मंज़र होगा ?

याद में तेरी आँखों से आँसु छलक जाते ,

अब हम हर सपनों में बस तुझे ही पाते ,

इस वीराने में भी जन्नत सा मज़ा आता ,

अगर हम एक दूसरे के हो जाते।

क्या ऐसा भी कोई मंज़र होगा ?

सुलघति हुई गलियों में होगा चलना ,

काँटों भरी राहों में होगा मिलना ,

बस प्यार तेरा पाना ही होगी मेरी मंज़िल ,

मेरे…

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Added by M Vijish kumar on January 3, 2014 at 2:00pm — 11 Comments

कविता - प्यार ....... बस तेरा प्यार .......

१ )

लाता एक नया रंग सा,

कुछ अलग एक नया ढंग सा,

कभी नशा सा, कभी मदहोशी सी,

मेरी ज़ुबान पे कभी ख़ामोशी सी।

प्यार ....... बस तेरा प्यार .......

२)

आस दिलाई फिरसे कसमों ने वादों…

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Added by M Vijish kumar on January 2, 2014 at 8:30am — 9 Comments

कविता - कसूर

गुस्ताख निगाहें भी पहली नज़र में फिसल गई ,

जी भर के देख भी न पाया ,

इसमें मेरा क्या कसूर था।

नादान दिल के कदम भी लड़खड़ाते-लड़खड़ाते संभल गए ,

दूरी मै  तय न कर पाया ,

इसमें राहों का क्या कसूर था।

चंद लम्हा भी तेरे बिन रेह न सका, तेरे प्यार में इतना मजबूर हुआ ,

वक़्त ने हरकत ऐसी ली,

इसमें मेरा क्या कसूर था।

रूबरू हुआ जब तुझसे मै, मुझपे सवार तेरा फितूर हुआ ,

ज़ोर किसी का कहाँ चलता है ,

इसमें दिल का…

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Added by M Vijish kumar on January 1, 2014 at 8:30pm — 12 Comments

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