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करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२१/२१२१/१२२१/२१२

जिसके लिए स्वयं को यूँ पाषान कर गये
दो फूल उसके आपको भगवान कर गये।१।
**
कारण से कुछ के मस्जिदें बदनाम हो गयीं
मन्दिर को लोग कुछ यहाँ दूकान कर गये।२।
**
करता रहा था जानवर रखवाली रातभर
बरबाद दिन में खेत को इन्सान कर गये।३।
**
अपनी हुई न आज भी  पतवार कश्तियाँ
क्या  खूब  दोस्ती  यहाँ  तूफान  कर गये।४।
**
दिखते नहीं दधीचि से परमार्थी सन्त अब
मरकर भी अपनी देह जो यूँ दान कर गये।५।
**
माटी भी उनके पाँव की हमको अजीज है
जो भी वतन के इश्क में विषपान कर गये।६।

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 31, 2020 at 9:25am

आ. भाई अमीरूद्दीन जी, संज्ञान के लिए आभार ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 31, 2020 at 7:47am

भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, आदाब। जी आपने ठीक कहा है कि इंगित मिसरा बह्र में है। गणना में मुझसे चूक हुई है, क्षमा करें। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 30, 2020 at 7:22pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 30, 2020 at 7:21pm

आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति से मानवर्धन के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 30, 2020 at 7:19pm

आ. भाई अमीरूद्दीन जी , सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।

#कारण से कुछ के - का मतलब कुछ लोगों के करण है । मेरे हिसाब सेइंगित मिसरा भी बह्र में ही है । सादर ..

Comment by सालिक गणवीर on May 30, 2020 at 4:45pm

आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी

सादर अभिवादन

क्या खूब दोस्ती यहाँ तूफान कर गए.।वाह

एक और अच्छी ग़ज़ल के लिए मेरी शुभकामना स्वीकारें.

Comment by Samar kabeer on May 30, 2020 at 2:59pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 30, 2020 at 12:37pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब। अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। कुछ सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूंँ, यदि ठीक लगें तो अपना सकते हैं अन्यथा नज़र अन्दाज़ कर दीजिएगा ।

मतले का भाव स्पष्ट नहीं हो पा रहा है ग़ौर कीजियेगा। 

"कारण से कुछ के मस्जिदें बदनाम हो गयीं" यहांँ 'कारण से' के स्थान पर 'कारण थे' कर सकते हैं।

"दिखते नहीं दधीचि से परमार्थी सन्त अब".  यह मिसरा बह्र से खारिज हो रहा है, "दिखते नहीं दधीचि से परमार्थी कहीं " कर सकते हैं

सादर। 

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