For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२ 

इस जिग़र में प्यास बाकी है बुझाने की कहो, 

झूमती काली घटा से छत पे आने की कहो. 

है मधुर आवाज़ उसकी और चेहरा खूबसूरत,

गीत सावन के सुहाने आज गाने की कहो. 

देखना गर चाहते हो इस जहाँ को ख़ुशनुमा, 

प्यार का पक्का मकाँ दिल में बनाने की कहो.

पीर दिल को दे गया पर जो हुआ अच्छा हुआ, 

अब हमें उस प्यार को मत भूल जाने की कहो.

प्यार की कीमत न की जब तक तुम्हारे पास था, 

जा चुका मैं दूर अब मत लौट आने की कहो.

जो मिला माँ बाप से उसकी कोई कीमत नहीं,

कर्ज ये मुझसे कभी भी मत चुकाने की कहो. 

गीत हो चाहे ग़ज़ल, है इल्तज़ा इतनी ‘बसंत’, 

बात जो कुछ भी कहो तुम बस ठिकाने की कहो.

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 563

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 13, 2020 at 5:37pm

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी सादर नमस्कार , आपने बहुत बारीक़ नजर से मेरी ग़ज़ल को देखा और तरमीम की, दिल से  शुक्रगुजार हूँ आपका, नुक्ते की गलतियां मुझसे कस्र हो जाती हैं, मैं सीखने का पूरा प्रयास कर रहा हूँ, इसी तरह मार्गदर्शन करते रहिये यही इल्तिजा है।  

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 13, 2020 at 5:33pm

आदरणीय  सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार - आपकी हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 13, 2020 at 5:33pm

आदरणीय  रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार - आपकी हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on July 13, 2020 at 5:32pm

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार - आपकी हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 12, 2020 at 2:22pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।

//है मधुर आवाज़ उसकी और चेहरा खूबसूरत,// ये मिसरा बह्र में नहीं है, चाहें तो इसे यूँ कर सकते हैं :

"है मधुर आवाज़ उसकी और चेहरा आफ़रीं,,     इसके इलावा चन्द टंकण त्रुटियों की ओर आपका ध्यानाकर्षण कराना चाहूँगा :

मतले के मिसरा ए ऊला में लफ़्ज़ 'जिगर' से नुक़्ता हटा लें और लफ़्ज़ बाकी में क के नीचे नुक़्ता लगा लें।

दूसरे शैर के मिसरा ए ऊला में लफ़्ज़ 'खूबसूरत' में ख के नीचे नुक़्ता लगा लें।

पाँचवें और छटे शैर में लफ़्ज़ 'कीमत' में क के नीचे नुक़्ता लगा लें, छटे शैर में लफ़्ज़ 'कर्ज' को 'क़र्ज़' कर लें। 

मक़ते के ऊला में आये लफ़्ज़ 'इल्तज़ा' से नुक़्ता हटा कर 'इल्तिजा' कर लें। 

बसंत कुमार शर्मा जी, जनाब ये सब मेरी पाठकीय राय मात्र हैं मैं भी सीख ही रहा हूंँ। अगर आप को उक्त सुझाव उचित न लगें तो आप उक्त टिप्पणी नज़र अन्दाज़ कर दीजिएगा। सादर।

Comment by सालिक गणवीर on July 11, 2020 at 9:47am

भाई बसंत कुमार शर्मा जी

बेहद खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाइयाँँ स्वीकार करें.

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on July 10, 2020 at 5:51pm

आदरणीय बसंत कुमार शर्मा साहिब, इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर आपको दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 10, 2020 at 10:11am

आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन । वर्षा रितु के हिसाब से उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति का सहज संशोधित स्वरूप।  हार्दिक बधाई"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त चित्र को आपने पूरे मनोयोग से परखा है तथा अंतर्निहित भावों को…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपने प्रस्तुति के माध्यम से प्रदत्त चित्र को पूरी तरह से शाब्दिक किया है…"
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद  परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण…"
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। तुकांतता के दोष में…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद आभार आपका लक्ष्मण भाईजी"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद लक्ष्मण भाई "
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी आदरणीय अशोक भाईजी  चौपाई में चित्र का  सम्पूर्ण  चित्रण हुआ है।…"
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चप्पल उसकी सिली न जाती। बिन चप्पल के वह रह जाती।।....वाह ! वाह ! प्रदत्त चित्र की आत्मा का भाव आपने…"
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी चित्र को विस्तार से छंद बद्ध करने के लिए हार्दिक बधाई । कुछ त्रुटियाँ मेरी नजर…"
11 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service