For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल- रोज़ सितम वो ढाते देखो हम बेबस बेचारों पर

रोज़ सितम वो ढाते देखो हम बेबस बेचारों पर
कोई अंकुश नहीं लगाता इन सरमाया दारों पर।

मजदूरों का जीवन देखो कितना मुश्किल होता है
बिस्तर पास नहीं जब होता सो जाते अख़बारों पर।

भूक ग़रीबी ज्यों की त्यों क्यों तख़्त नशीं कुछ तो बोलो
दोष मढ़ोगे कब तक आख़िर पिछली ही सरकारों पर।

वक़्त नहीं है पास किसी के सबको अपनी आज पड़ी
दौर पुराना ख़्वाब लगे जब भीड़ जुटे चौबारों पर।

बच्चे झुककर बात करेंगे घर के सारे लोगों से
आईने जब लग जाएँगे घर की सब दीवारों पर।

शह पर सरमाया दारों की झूठी ख़बरें छाप रहे
कैसे अब विश्वास करें हम यारो इन अख़बारों पर।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 639

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on July 18, 2020 at 4:26pm

आद0 रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और दाद के लिए हृदय से शुक्र गुजार हूँ। आभार आपका

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on July 16, 2020 at 12:32pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी, इस लाजवाब ग़ज़ल पर दाद और बधाई क़ुबूल फ़रमाएँ!

Comment by नाथ सोनांचली on July 14, 2020 at 1:00pm

आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन

ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया का हृदयतल से आभार बन्धुवर। सादर

Comment by नाथ सोनांचली on July 14, 2020 at 12:59pm

आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन।

ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से आभार निवेदित करता हूँ।

Comment by नाथ सोनांचली on July 14, 2020 at 12:58pm

आद0 प्रिय भाई सालिक गणवीर जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और दाद के लिए हृदयतल से अभिनन्दन, आभार। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 14, 2020 at 12:45pm

आ. भाई सुरेंद्र नाथ जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 14, 2020 at 11:16am

हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।बेहतरीन गज़ल।

शह पर सरमाया दारों की झूठी ख़बरें छाप रहे
कैसे अब विश्वास करें हम यारो इन अख़बारों पर।

Comment by सालिक गणवीर on July 14, 2020 at 10:45am

भाई सुरेंद्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्ररप'

सादर अभिवादन

एक बेहद शानदार ग़ज़ल के लिए शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद स्वीकार करें. सादर.

Comment by नाथ सोनांचली on July 14, 2020 at 9:48am

आद0 अमीरुद्दीन 'अमीर' जी सादर अभिवादन। आपकी बात सर आँखों पर। यह बहरे मीर पर ग़ज़ल लिखी थी

22 22  22 22 22 22 22 2

आपकी उपस्थिति और दाद का हृदयतल से अभिनन्दन। आभारी हूँ आपका

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on July 13, 2020 at 7:05pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' साहिब आदाब, इस ख़ूबसूरत और प्यारी ग़ज़ल पर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । सादर । आपसे निवेदन है कि ग़ज़ल की बह्र लिख दिया करें। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
8 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
18 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service