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दीपावली - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल )

२१२२/२१२२/२१२२/२१२


मेटती  आयी  है  घर  की  तीरगी  दीपावली
सब के मन में भी करे अब रोशनी दीपावली।१।
**
रीत कितने ही  युगों  से  चल रही हो ये भले
हर बरस लगती है सब को पर नई दीपावली।२।
**
तोड़ आओ ये नगर का जाल कहती साथियों
गाँव  की  नीची  मुँडेरों  पर  जली  दीपावली।३।
**
दीप सब ये प्रेम और' विश्वास के हैं इसलिए
आँख चुँधियाती नहीं  साथी  घनी दीपावली।४।
**
घुट गया है आज तम का दम अकेले में यहाँ
कह रही झोपड़  अटारी  पर सजी दीपावली।५।
**
एक बुझता  है  तो  जलता  है  कँगूरे पर नया
गौर कर समझो तो सबकी जिन्दगी दीपावली।६।
**
है नहीं उनके मुक़द्दर  में  यहाँ इक दीप जब
क्यों अमा की रात में फिर यूँ मनी दीपावली।७।
**
आज तो अँधियार ढल कर ही रहेगा मानिए
दीप से जब दीप जलकर बन गयी दीपावली।८।
**
कुछ न दे निर्धन को धन की देवी चाहे आज पर
नित  करे  जगमग  यहाँ  उम्मीद  की  दीपावली।९।
**
दीप पथ के जागते हैं जब अमावस जान कर
है  'मुसाफिर'  सत्य  अर्थों  में  वही दीपावली।१०।
**

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

( सम्पूर्ण ओबीओ परिवार को पावन पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ )

Views: 610

Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 22, 2020 at 7:44pm

 आ. भाई बृजेश जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 22, 2020 at 7:41pm

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 22, 2020 at 7:40pm

आ. भाई समर जी सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 19, 2020 at 9:15pm

वाह वाह आदरणीय धामी जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है दीवाली के उपलक्ष में...

Comment by TEJ VEER SINGH on November 19, 2020 at 12:23pm

हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी। लाज़वाब गज़ल।

घुट गया है आज तम का दम अकेले में यहाँ
कह रही झोपड़  अटारी  पर सजी दीपावली।५।
**

Comment by Samar kabeer on November 18, 2020 at 7:05pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

आपको भी दीपाली की हार्दिक बधाई

और शुभकामनाएँ ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 16, 2020 at 5:57pm

आ. भाई चेतन प्रकाश जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, स्नेह व कमियों को इंगित करने के लिए हार्दिक धन्यवाद। मतले में शीघ्र सुधार का प्रयास करता हूँ । सादर...

Comment by Chetan Prakash on November 16, 2020 at 3:29pm

भाई लक्ष्मण धामी जी, दीपावली भाई दूज दोनों मुबारक हो ! भाई जी आपकी ग़ज़ल के मतले के मिसरों मेंं राबता नहीं जान पड़ा। बाकी शेऱ अच्छे है।

कृपया ध्यान दे...

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