For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नेह के आंसू को सरजू कहता हूँ

अपनेपन से तुझको मैं तू कहता हूं।

                    **

रात छत पे जब निकल आता है तू

इन सितारों को मैं जुगनू कहता हूँ।                      **   

       

 ये जो तन से मेरे आती है महक़..

मैं इसे भी तेरी खुशबू कहता हूँ।

                      **

ये अदब,शोख़ी, नज़ाकत, लहज़े में..

मैं इसी लहज़े को उर्दू कहता हूँ।

                      **

सब थकन मेरी पी जाती है ये धूप

मैं सदा को तेरी जादू कहता हूँ।

                     **

जान कहता था जो तू ,सो अब भी मैं

जान खुदको तुझको जानू कहता हूँ।

******************************

         मौलिक व अप्रकाशित

******************************

Views: 1634

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 3, 2021 at 8:31pm

बहुत ही भावपूर्ण ग़ज़ल कही है आदरणीय..बधाई

Comment by Samar kabeer on February 26, 2021 at 5:53pm

// क्या सभी मिसरों में रवानी नहीं है//

बिल्कुल !

मिसाल के तौर पर:-

'नेह के आंसू को सरजू कहता हूँ

अपनेपन से तुझको मैं तू कहता हूं'

इस मतले की तक़ती'अ देखें:-

नेह के--22

आँसू--22

को सर--22

जू कह-22

ता हूँ--22---यानी 5 फ़ेलुन

अपने--22

पन से--22

तुझको--22

मैं तू--22

कहता--22

हूँ--2---5 फ़ेलुन 1 फ़ा

एक बात हमेशा ध्यान में रखें कि मात्रा पतन अरूज़ का कोई नियम नहीं है, सिर्फ़ एक छूट है, जितना कम मात्रा पतन होगा उतना ही शैर सुंदर होगा ।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 26, 2021 at 4:15pm

सादर अभिवादन समर सर क्या सभी मिसरों में रवानी नहीं है?

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 26, 2021 at 3:55pm

आ. भैया लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी हौसलाफजाई के लिए बहुत शुक्रिया हार्दिक आभार।

Comment by Samar kabeer on February 24, 2021 at 10:58pm

जनाब जान गोरखपुरी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिम बहुत ज़ियादा मात्रा पतन से मिसरे रवानी में नहीं हैं,बधाई स्वीकार करें ।

'सब थकन मेरी पी जाती है ये धूप'

इस मिसरे को यूँ कहना उचित होगा:-

'जब थकन पी जाती है मेरी ये धूप'

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 24, 2021 at 8:57pm

आदरणीय समर सर ग़ज़ल पर आपका बेसब्री से इंतजार था। पोस्ट में अरकान लिखना भूल गया। 

2122 2122 212

Comment by Samar kabeer on February 24, 2021 at 8:52pm

जनाब जान गोरखपुरी जी आदाब, इस ग़ज़ल पर कुछ लिखने से पहले जानना चाहता हूँ कि आपने अरकान क्या लिये हैं?

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 24, 2021 at 6:04am

आ. भाई क्रिस जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 21, 2021 at 6:39pm

हार्दिक आभार भाई गुमनाम पिथौरागढ़ी जी ग़ज़ल पर आपकी मोहब्बतों के लिए।

Comment by gumnaam pithoragarhi on February 20, 2021 at 5:57pm

भाई जी वाह अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service