For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है (११५ )

ग़ज़ल (1222 *4 )

.

उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है 
प्रकृति जब जब करे शृंगार कविता जन्म लेती है 
***
नहीं देखा अगर जाये किसी से जुल्म निर्धन पर
बने संघर्ष जब आधार कविता जन्म लेती है 
***
हुआ विचलित अगर मन है किसी भी बात को लेकर
गलत जब हो नहीं स्वीकार कविता जन्म लेती है 
***
कभी पीड़ा हुई इतनी हुआ सहना जिसे मुश्किल
बहे जब आँसुओं की धार कविता जन्म लेती है 
***
नयन देखे कहीं पर खूबसूरत नायिका अप्रतिम
लगें बजने हृदय के तार कविता जन्म लेती है 
***
ज़रूरी हो गया सरकार की करतूत पर लिखना
बने जब जब क़लम तलवार कविता जन्म लेती है 
***
बसंती हो गया मौसम चली होली की' पिचकारी
मनाते जब भी' हम त्यौहार ,कविता जन्म लेती है 
***
उड़ानें नित्य सपनों की नहीं संभव कि हों पूरी
सपन होते कभी साकार कविता जन्म लेती है 
***
'तुरंत' अब तक यही देखा दुखों की हो विदाई जब
खुशी के पल मिलें दो चार कविता जन्म लेती है 
***
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' बीकानेरी |

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 65

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 7, 2020 at 6:32pm

भाई रामबली गुप्ता जी , उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार  , मेरे विचार में शब्दों के हेर फेर से कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला है कथ्य वही का वही रहेगा | जब की जगह तब तो क़तई आवश्यक नहीं ,क्योंकि जब ही कथ्य को स्पष्ट कर रहा है | 

Comment by रामबली गुप्ता on July 7, 2020 at 6:27pm

सुंदर सर्जना के लिए बधाई स्वीकारें आदरणीय 

कुछ जगह मुझे लगा शब्दों को बदला जाना चाहिए जैसे-

बने संघर्ष जब<तब

हुआ विचलित अगर मन है<अगर विचलित हुआ है मन

बहे जब आसुओं की धार<बहे तब आसुओं की धार

सपन होते कभी साकार< सपन हों जब कभी साकार

देखें जरा एक बार

पाठकीय टिप्पणी मात्र समझें

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 5, 2020 at 1:53pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 5, 2020 at 1:52pm

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर'  साहेब , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 5, 2020 at 12:17pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत जी, आदाब। 

सुन्दर रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 5, 2020 at 9:39am

आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई सतविन्द्र जी, सादर अभिवादन । प्रदत्त विषय पर अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
13 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन । दोहों की सराहना के लिए आभार।"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीया Rachna Bhatia साहिबा, नज़्म में आपकी शिरकत और सुख़न-नवाज़ी के लिए तह-ए-दिल से आपका…"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब, नमस्कार। हिन्दी की ख़ुशबू से महकती इस सुंदर ग़ज़ल…"
2 hours ago
Rachna Bhatia commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीय रवि भसीन'शाहिद' जी बेहतरीन नज़्म लिखी। बधाई स्वीकार करें।"
3 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"कुछ गुम कुछ आगे दिखते थे, उनको याद करें शोणित से इतिहास रचे थे, उनको याद करें। स्वयं पेट को पट्टी…"
6 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

आज़ादी के पुनीत पर्व पर वीर रस की कविता

आज पुनः जब मना रहे हम, वर्षगाँठ आज़ादी कीआओ थोड़ी चर्चा करलें, जनगण मन आबादी कीजिन पर कविता गीत लिखूँ…See More
6 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो

बह्र-ए-मीर पतझर में भी गीत बसंती गाऊँ तो जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तोअंदर का अँधियारा क्या छट…See More
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन । प्रदत्तविषय पर सुन्दर गीत रचा है । हार्दिक बधाई ।"
8 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ0 लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर दोहे। बधाई। आजादी का पर्व है, घर घर मंगल गान।उड़े तिरंगा शान से, देश…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"दोहे कितने बिश्मिल बोस ने, किया शीष का दान तब जा कर वापस मिला, यहाँ देश को मान।१। ** काम पुण्य का…"
10 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"(शहीदों की शहादत)2122*3+212 (गीतिका छंद आधारित)(पदांत 'मन में राखलो', समांत…"
10 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service