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'ईको-फ्रेंडली प्रकाश-मित्र' [कुछ हाइकु]

कुछ  'दीवाली-हाइकु' :

 

1-

दिल्ली-दीवाली

(दिली-दीवाली)
दीपक-दिलवाली
ईको-फ्रेंडली

2-

कुम्हार-कला
मिट्टी, भावों से खिला
ये दीपोत्सव

3-

प्रज्जवलित
दीप कुम्हार वाले
सीप के मोती

4-

सीप का मोती
दीवाली-महोत्सव
रिश्तों की खेती

5-

मानवीयता
दानवीयता परे
दीवाली भरे

6-

दिव्य-दीवाली
दशा-दिशा निमित्त
दीप-चरित्र

7-

दीप-चरित्र
माटी-तेल व बाती
प्रकाश-मित्र

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 11, 2018 at 12:11pm

 मेरे ब्लॉग--पटल पर नियमित पाठक रूपेण समय देकर रचनाओं के अनुमोदन और मेरी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब  बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब। समालोचनाओं और 

मार्गदर्शन की भी ग़ुज़ारिश है।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 11, 2018 at 12:09pm

मेरे ब्लॉग--पटल पर नियमित पाठक रूपेण समय देकर रचनाओं के अनुमोदन और मेरी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब  बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब। समालोचना और मार्गदर्शन की भी 

गुज़ारिश है। क्षमा करें शायद अभी अभी धोखे से आपकी टिप्पणी डिलीट हो गई मेरी जवाबी टिप्पणी एडिट करते समय।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 6, 2018 at 4:06pm

आदाब। आपके अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई से हाइकु अभ्यास भी यूं कर लिया करता हूं। तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब।

Comment by Samar kabeer on November 6, 2018 at 11:16am

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,दीवाली के मौक़े पर बहुत उम्दा हाइकू हुए हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 6, 2018 at 4:16am

रचनाओं पर समय देकर अनुमोदन और प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 5, 2018 at 7:56pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।बेहतरीन हाइकू।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 5, 2018 at 7:07pm

रचनाओं पर समय देकर हौसला अफ़ज़ाई हेतु हार्दिक आभार आदरणीया नीलम उपाध्याय साहिबा। दीपोत्सव पखवाड़े पर आप सभी को हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं।

Comment by Neelam Upadhyaya on November 5, 2018 at 12:24pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, दीवाली के अवसर के अनुरूप बहुत ही बढ़िया हाइकू की रचना हुई है।  हार्दिक बढ़ायी स्वीकार करें। 

"दीप-चरित्र
 माटी-तेल व बाती
 प्रकाश-मित्र"

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