For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल--122--122 / 122 --122 चमन की कहानी

कहूँ आपसे क्या थकन की कहानी

न समझोगे गाफ़िल बदन की कहानी

 

बनाती है ज़र्रे को रोशन सितारा

लुभाती बहुत है लगन की कहानी

 

समझ लो य’ अश्कों का सावन निरख कर

लबों से कहूँ क्या नयन की कहानी

 

जली उँगलियों से ज़रा पूछ आओ

कहेंगे फफोले हवन की कहानी

 

हर इक गम को ढाला ग़ज़ल में मुसल्सल

है झूठी अदीबों ग़बन की कहानी

 

सुनाते मिलेंगे चहकते चहकते

कफ़स में परिंदे चमन की कहानी

 

किरन दर किरन सुनाओ फ़ज़ा को

वो ‘खुरशीद’ नीले गगन की कहानी

मौलिक व अप्रकाशित 

 

Views: 602

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 26, 2015 at 8:42pm

बहुत शनदार ग़ज़ल कही इन शेरो के लिए तो बारम्बार दाद 

जली उँगलियों से ज़रा पूछ आओ

कहेंगे फफोले हवन की कहानी

 

हर इक गम को ढाला ग़ज़ल में मुसल्सल

है झूठी अदीबों ग़बन की कहानी

 

सुनाते मिलेंगे चहकते चहकते

कफ़स में परिंदे चमन की कहानी

 तहे दिल से बधाई लीजिये आ० खुर्शीद भैय्या 

Comment by khursheed khairadi on February 26, 2015 at 8:39am

आदरणीय मिथिलेश जी ,आदरणीय महर्षि त्रिपाठी जी ,आदरणीय हरिप्रकाश सर ,आप सभी के स्नेह का शुक्रगुजार हूं |सादर आभार |

Comment by khursheed khairadi on February 26, 2015 at 8:37am

आदरणीय गोपालनारायण सर ,आदरणीय गिरिराज सर ,आप जैसे महानुभवों का आशीर्वाद सदा बना रहे| आप द्वारा सुझाया मिसरा 

किरन दर किरन अब सुनाओ फ़ज़ा को i .....भी काफ़ी अच्छा है , किंतु यह ग़ज़ल महीनों पहले लिखी हुई है तथा इसके मूल पाठ में मिसरा निम्नवत है ,इसलिय क्षमा प्रार्थना के साथ मिसरा कॉपी \पेस्ट कर रहा हूं |इस मंच पर टाइपिंग के समय  'फिर ' छूट गया था |

किरन दर किरन फिर सुनाओ फ़ज़ा को

वो ‘खुरशीद’ नीले गगन की कहानी

आपकी सजगता वंदनीय है |आशीर्वाद बनाये रखियेगा |सादर आभार 

Comment by Hari Prakash Dubey on February 25, 2015 at 11:48pm

आदरणीय खुर्शीद खैरादी जी बहुत खूब..../ जली उँगलियों से ज़रा पूछ आओ

कहेंगे फफोले हवन की कहानी/ ..शानदार ग़ज़ल ,बधाई आपको ! सादर .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 25, 2015 at 8:23pm
आदरणीय खुर्शीद सर बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। शेर दर शेर दाद कुबूल कीजिये। हार्दिक बधाई निवेदित है।
Comment by maharshi tripathi on February 25, 2015 at 5:57pm

हर इक गम को ढाला ग़ज़ल में मुसल्सल

है झूठी अदीबों ग़बन की कहानी

 

सुनाते मिलेंगे चहकते चहकते

कफ़स में परिंदे चमन की कहानी

 बहुत सुन्दर खुर्शीद जी ,,,,,,ये कुछ मिसरे मुझे खूब भाए ,,,,,आपको हार्दिक बधाई |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 25, 2015 at 5:33pm

आदरणीय खुर्शीद भाई , रदीफ बहुत कठिन ले कर आपने सरलता से निबाह लिया है आपने !! पूरी गज़ल बेमिसाल है ॥ हार्दिक बधाइयाँ कुबूल करें ॥ 

किरन दर किरन सुनाओ फ़ज़ा को  --  आदरणीय इस मिसरे मे शायद एक शब्द टाइप होना रहगया है । देख लीजियेगा ॥

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 25, 2015 at 4:26pm

आ० खुर्शीद जी

किरन दर किरन सुनाओ फ़ज़ा को------- मेरी तुच्छ मति में यह पंक्ति आपसे कुछ और समय चाहती है i  यदि ऐसा हो --- किरन दर किरन अब सुनाओ फ़ज़ा को i  सादर i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति का सहज संशोधित स्वरूप।  हार्दिक बधाई"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त चित्र को आपने पूरे मनोयोग से परखा है तथा अंतर्निहित भावों को…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपने प्रस्तुति के माध्यम से प्रदत्त चित्र को पूरी तरह से शाब्दिक किया है…"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद  परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण…"
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के…"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। तुकांतता के दोष में…"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
20 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद आभार आपका लक्ष्मण भाईजी"
20 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद लक्ष्मण भाई "
20 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी आदरणीय अशोक भाईजी  चौपाई में चित्र का  सम्पूर्ण  चित्रण हुआ है।…"
21 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चप्पल उसकी सिली न जाती। बिन चप्पल के वह रह जाती।।....वाह ! वाह ! प्रदत्त चित्र की आत्मा का भाव आपने…"
22 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service