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छन्न पकैया छन्न पकैया , ऐसे मेरे नाना
रोज़ सवेरे पानी देते , औ देते थे दाना

छन्न पकैया छन्न पकैया , खुश होते थे नाना
उड़ते हुए परिंदे आते , सब चुगने थे दाना

छन्न पकैया छन्न पकैया ,था उनका ये कहना
आपनी तरह परिंदों का भी, खयाल रखना बहना

छन्न पाकैया छन्न पकैया,सबको ये समझाना
पशु पक्षी पेडों पौधों से, प्यार सदा जतलाना

छन्न पकैया छन्न पकैया , जीना चाहें मरना
नाना सदा यही कहते थे ,प्रेम सभी से करना ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 16, 2017 at 9:33am
Dhanywad aadrniya Pratibha di
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 16, 2017 at 9:33am
Dhanywad aadrniya Satvinder bhaiya
Comment by pratibha pande on May 16, 2017 at 8:48am
नाना जी के माध्यम से अपने पक्षि प्रेम को सुन्दर भाव दिये हैं आपने बधाई आदरणीया कल्पना जी
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 15, 2017 at 5:48pm
आदरणीय कल्पना दीदी,आपकी छंदों में रूचि और उन पर अभ्यास सही दिशा में जा रहा है,आप लगे रहैं।इस प्रयास के लिए हारदिक बधाई स्वीकारें!
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 15, 2017 at 10:21am
Ji adarniya

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 15, 2017 at 9:45am

आदरनीया कल्पना जी , छन्न पकैया छंद रचना की अच्छी कोशिश हुई है , हार्दिक बधाइयाँ । कमियों  पर आ. समर भाई जी कह ही चुके हैं , ध्यान दीजियेगा ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 15, 2017 at 9:09am
बह्र ए कैद के माने आखरी शब्द को दोबाराइस्तेमाल नहीं करनाक्या यही होता है
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 15, 2017 at 6:51am
आदरणीय समर साहब बहुत बहुत धन्यवाद । मैं नहीं समझ पा रही थी कहाँ गलती हो रही है , सादर धन्यवाद सर ।
Comment by Samar kabeer on May 14, 2017 at 10:49pm
मोहतरमा कल्पना भट्ट साहिबा आदाब,सारछन्द का अच्छा प्रयास हुआ है,इसके लिये बधाई स्वीकार करें ।
दूसरे छन्द में ऐसा करें ;-
'सब चुगते थे दाना'
तीसरे छन्द में 'ख़याल तुम रखना';10 मात्रा ,और तुकान्तता भी सही नहीं है,इसे यूँ कर लें :-
'ख़याल रखना बहना'

चौथे छन्द में :-
'पशु पक्षी पेड़ पौधों ने'-15 मात्रा,'प्यार उनका जाना-11मात्रा, और तुकान्तता भी सही नहीं,इस छन्द को यूँ कर लें:-

'छन्न पकैया छन्न पकैया,सबको ये समझाना
पशु पक्षी पेड़ों पौधों से,प्यार सदा जतलाना'

आख़री छन्द में:-
'कहते थे नाना हमेशा'-15 मात्रा, और तुकान्तता भी सही नहीं,इसे यूँ कर लें:-

'छन्न पकैया छन्न पकैया,जीना चाहे मरना
नाना सदा यही कहते थे,प्रेम सभी से करना'

बाक़ी शुभ शुभ ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 14, 2017 at 10:01pm
Kya hota hai yeh

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