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बोझ ...(250 वीं रचना )

बोझ ...

हम
कहाँ जान पाते हैं
चेतन या अवचेतन में
अटकी हुई कुंठाओं की
मूक भाषा को

उनींदी सी अवस्था में
कुछ सिमटी हुई
आशाओं को

मन में उबलते
एक असीमित बोझ की
पहचान को

साँसों की थकान
अश्रु की व्यथा
और
रुदन के आह्वान को

तुम्हारे
स्पर्श की अनुभूति में लिप्त
क्षणों की
परिणिती के आभास ने
यूँ तो
अंजाने संताप से
मुक्ति का ढाढस दिया
किन्तु
जागृति बोध से
हृदय की कंदराओं में
क्यूँ रह रह के
ये विचार आता है
कि कहीं
ये किंचित मात्र सा आभास भी
किसी स्वप्न-रेख सा
ओझल हो गया तो
शायद
जीना भी
इक बोझ
न बन जाए

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 725

Comment

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Comment by Sushil Sarna on May 8, 2017 at 4:15pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी रचना के भावों को सहमति देती आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। अपरिहार्य कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ।

Comment by Sushil Sarna on May 8, 2017 at 4:15pm

आदरणीय समर कबीर साहिब रचना के भावों को अपनी मधुर प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार। अपरिहार्य कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ।

Comment by Sushil Sarna on May 8, 2017 at 4:15pm

आदरणीय गिरिराज जी भाई साहिब प्रस्तुति के भावों मान देती आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभार। अपरिहार्य कारणों से आभार व्यक्त करने में विलम्ब हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 7, 2017 at 9:21am
Bhavpurn rachna hui hai adarniya Sushil ji.
Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 9:54pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,आपकी हर कविता सोचने पर मजबूर करती है,बहुत ख़ूब वाह, इस बहतरीन प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 5, 2017 at 8:08pm

आदरनीय सुशील भाई , एक् और अच्छी कविता के लिये आपको हार्दिक बधाई ।

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2017 at 6:55pm

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी प्रस्तुति को अपनी मधुर प्रतिक्रिया से अलंकृत करने का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2017 at 6:55pm

आदरणीय  Mohammed Arif साहिब प्रस्तुति में निहित भावों को सहमति देती आपकी प्रशंसात्मक प्रतिक्रिया का दिल शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on May 5, 2017 at 6:55pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan जी प्रस्तुति को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार।

Comment by नाथ सोनांचली on May 5, 2017 at 3:42am
आद0 सुशील सरना जी बेहद भावपूर्ण रचना, बधाई

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