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यह प्रणय निवेदित है तुमको

हे रूपसखी हे प्रियंवदे
हे हर्ष-प्रदा हे मनोरमे
तुम रच-बस कर अंतर्मन में
अंतर्तम को उजियार करो
यह प्रणय निवेदित है तुमको
स्वीकार करो, साकार करो

अभिलाषी मन अभिलाषा तुम
अभिलाषा की परिभाषा तुम
नयनानंदित - नयनाभिराम
हो नेह-नयन की भाषा तुम
हे चंद्र-प्रभा हे कमल-मुखे
हे नित-नवीन हे सदा-सुखे
उद्गारित होते मनोभाव
इनको ढालो, आकार करो
यह प्रणय निवेदित है तुमको
स्वीकार करो साकार करो

मैं तपता थल तुम हो छाया
मैं सदा दीन तुम हो माया
जब-जब लिक्खा, तुमको लिक्खा
जब-जब गाया, तुमको गाया
हे सुमुखि-केशिनी-रूपवते
हे मधुर-भाषिता, मुग्ध-मते
इस विस्तारित आकर्षण का
कुछ तो स्नेहिल आधार करो
यह प्रणय निवेदित है तुमको
स्वीकार करो साकार करो 

आशीष यादव 

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by आशीष यादव on September 11, 2020 at 3:45pm

आदरणीय रवि शुक्ला सर, सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Comment by आशीष यादव on September 11, 2020 at 3:44pm

आदरणीय सुरेंद्र नाथ कुशक्षत्रप जी प्रणाम, सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Comment by आशीष यादव on September 11, 2020 at 3:43pm

आदरणीया अन्विता जी प्रणाम। सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Comment by Ravi Shukla on June 16, 2020 at 2:37pm

आद0 आशीष यादव जी सुंंदर  गीत का सृजन हुआ है । इस सृजन पर बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by नाथ सोनांचली on June 16, 2020 at 8:25am

आद0 आशीष यादव जी सादर अभिवादन

बेहद खूबसूरत गीत सृजन हुआ है । इस सृजन पर बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by Anvita on June 15, 2020 at 10:24pm
आशीष यादव जी अभिवादन. आपकी रचना में भाषा और शाब्दिक चयन बहुत सुंदर हुआ है ।बधाई स्वीकार करें ।सादर अन्विता ।
Comment by आशीष यादव on June 15, 2020 at 7:23pm

आदरणीय श्री Samar kabeer सर, 

बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by आशीष यादव on June 15, 2020 at 7:21pm

आदरणीय श्री अमीरुद्दीन 'अमीर' सर, 

 सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Comment by Samar kabeer on June 15, 2020 at 6:50pm

जनाब आशीष यादव जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on June 15, 2020 at 2:48pm

जनाब आशीष यादव जी, आदाब। 

सुंदर गीत की रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। 

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