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आजकल खुद से हमारी पट रही है - गजल

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ 

ज़िंदगी अच्छी तरह अब कट रही है, 

आजकल खुद से हमारी पट रही है. 

 

लूट कर वो ले गई  है दिल हमारा, 

झूलती रुखसार पर जो लट रही है. 

 

हाल पूछा जो हमारा आज उसने, 

हर पुरानी पीर दिल की घट रही है.

 

धुंध दुख की छँट गई माँ की दुआ से,

रेल सुख की दौड़ अब सरपट रही है.  

 

धीरे-धीरे दिख रहा है साफ सब कुछ 

धूल मन के आईने की हट रही है.

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 14, 2020 at 6:45pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार 

आपकी निरंतर हौसला अफजाई मुझे सम्बल प्रदान करती है , दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 14, 2020 at 6:44pm

आदरणीय  Rupam kumar -'मीत' जी सादर नमस्कार 

आपका दिल से शुर्किया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 14, 2020 at 6:43pm

आदरणीय  Samar kabeer  जी सादर नमस्कार 

आपकी तरमीम का दिल से शुक्रिया, सुझाव बहुत अच्छा है हमेशा की तरह , सुधार कर पुन प्रस्तुत करता हूँ 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 14, 2020 at 6:41pm

आदरणीय Harash Mahajan जी सादर नमस्कार 

हृदय से आभार आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on September 14, 2020 at 6:41pm

जनाब  अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब 

आपकी हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 13, 2020 at 6:40pm

आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on September 13, 2020 at 12:13pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

'ज़िंदगी अच्छी तरह से कट रही है'

इस मिसरे में 'तरह' शब्द के साथ 'से' का प्रयोग उचित नहीं होता,मिसरा यूँ कर सकते हैं:-

'ज़िन्दगी अच्छी तरह अब कट रही है'

 'थोड़ी-थोड़ी छा गई थी धुंध गम की'

ये मिसरा उचित लगे तो यूँ कर लें:-

'ज़िन्दगी पर छाई थी जो धुंद ग़म की' 

'हाल पूछा है हमारा आज उसने'

इस मिसरे में 'है' की जगह " जो" शब्द उचित होगा ।

Comment by Harash Mahajan on September 12, 2020 at 7:01pm

आदरणीय बसंत जी बहुत ही अच्छी पेशकश ।

दिली मुबारकबाद ।

वसूल पाइएगा ।

सादर ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on September 12, 2020 at 3:16pm

आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।

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