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ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया

वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
तो क्या उस ने तेरी यादों वाला कमरा देख लिया?
.
वैसे उस इक पल में भी हम अपनों ही की भीड़ में थे
जिस पल दिल के आईने में ख़ुद को तन्हा देख लिया.
.
उस के जैसा दिल तो फिर से मिलता हम को और कहाँ
सो हमने इक राह निकाली, मिलता जुलता देख लिया.
.
मैख़ाने में एक शराबी अश्क मिलाकर पीता है
यादों की आँधी ने शायद उसे अकेला देख लिया.
.
महशर पर हम उठ आए उस की महफ़िल से ये कहकर
तेरी दुनिया तुझे मुबारक़! तेरा होना देख लिया.
.
बिकने पे आए थे हम भी, शुक्र मनाओ बिक न सके
बोली जिस जिस ने भी लगाई, हम से सस्ता देख लिया.
.
“नूर” इस दुनिया से जाने की तेरी बेला आन पड़ी
तूने वैसे भी जो कुछ था देखने जैसा देख लिया.
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

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Comment by सालिक गणवीर on September 15, 2020 at 2:10pm

आदरणीय निलेश 'नूर' साहिब

सादर अभिवादन

बह्र-ए-मीर पर इस शानदार ग़ज़ल के लिए दाद और मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए. कबीर साहब की इस्लाह के बाद ये और भी ख़ूबसूरत हो गई है.

ला

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 15, 2020 at 12:34pm

शुक्रिया आ. हरष जी,

आभार 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 15, 2020 at 12:33pm

आ. समर सर,
मैं स्वयं मतले से संतुष्ट नहीं था लेकिन यह सोचकर पोस्ट कर दी ग़ज़ल कि यहाँ आपके और अन्य साथियों के मार्गदर्शन से कुछ बेहतर बन जाए..यह कमेंट लिखते हुए एक ख़याल आया है देखिएगा..
.
वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
तो क्या उस ने तेरी यादों वाला कमरा देख लिया?
.
अन्य मिसरा यूँ कर रहा हूँ..
.
उस के जैसा दिल तो फिर से हम को मिलता और कहाँ
.
ये दोनों मिसरे आपके अनुमोदन से दुरुस्त किये लेता हूँ..
सादर 

Comment by Harash Mahajan on September 15, 2020 at 11:51am

बेहद ख़ूबसूरत अहसासों से भरपूर ग़ज़ल पेश की है आपने आदरणीय नीलेश जी । मेरी ज़ानिब से ढ़ेरों दाद वसूल पाइयेगा ।

सादर ।

Comment by Samar kabeer on September 14, 2020 at 8:51pm

जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, बह्र-ए-मीर पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

'यानी तेरी यादों वाला वो भी कमरा देख लिया?

इस मिसरे में 'वो भी कमरा' वाक्य विन्यास मुझे ठीक नहीं लगा, सहीह वाक्य होगा "वो कमरा भी'' मगर यहाँ क़ाफ़िया की मजबूरी है, कोई दूसरा विकल्प देख सकते हैं ।

'उस के जैसा दिल तो फिर से मिल पाता हमें और कहाँ'

इस मिसरे को अगर यूँ कहें तो रवानी बढ़ जाएगी:-

'और कहाँ मिल पाता हमको उसके जैसा दिल फिर से'

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