For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल (दामन बचा के हमने दिल पर उठाए ग़म भी)

2212 - 1222 - 212 - 122

दामन बचा के हमने दिल पर उठाए ग़म भी

बेदाग़ हो गये हैं सब कुछ लुटा के हम भी

कुछ ख़्वाब थे हसीं कुछ अरमाँ थे प्यारे प्यारे

अहल-ए-वफ़ा से तालिब थे तो वफ़ा के हम भी 

उस शख़्स-ए-बावफ़ा से सबने वफ़ा ही पाई

ये बात और है के हम को मिले हैं ग़म भी 

गर्दिश में हूँ अगरचे रौशन है दिल की महफ़िल 

लब ख़ुश्क़ हैं तो क्या है आँखे हैं मेरी नम भी 

ज़ुल्फ़ों की छाँव मिलती पलकों का साया होता 

होती जो अपनी क़िस्मत होते किसी के हम भी 

हमने तबस्सुमों में ढाँपा था ग़म को अपने 

पर्दे में रखके ग़म को ख़ुश थे बहुत ही हम भी 

संग-ए-सितम तो मुझ पर फेंके थे उस ने ज़्यादा 

गहरी है ज़र्ब-ए-दिल पर यूँ ज़ख़्म आए कम भी 

क्या बस 'अमीर' कह दूँ क्या मेरी ज़िन्दगी अब

हैं फिर तलाश में ग़म दर्द-ओ-कसक अलम भी 

''मौलिक व अप्रकाशित'' 

Views: 598

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 12, 2021 at 7:28pm

जनाब कृष मिश्रा 'जान' साहिब आदाब, मुहतरम ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर। 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 12, 2021 at 5:46pm

आ.अमीरुद्दीन सर बेहतरीन ग़ज़ल हुई दिली मुबारक स्वीकार करें आदरणीय।

ये दो शे'र खासे पसन्द आएं।

गर्दिश में हूँ अगरचे रौशन है दिल की महफ़िल 

लब ख़ुश्क़ हैं तो क्या है आँखे हैं मेरी नम भी .....ग़ज़ब का तसव्वुर।

ज़ुल्फ़ों की छाँव मिलती पलकों का साया होता 

होती जो अपनी क़िस्मत होते किसी के हम भी......आहहहह.. दिल छील गया ये शे'र।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 10, 2021 at 11:28am

जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया, जनाब मतले में अम की बंदिश के साथ हरेक शे'र में अम की बंदिश है।

ग़्+अम = ग़म, ह्+अम = हम, न्+अम = नम, क्+अम = कम, ल्+अम = लम। सादर। 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 6, 2021 at 6:30pm

जनाब लक्ष्मण धामी भाई 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।  सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 6, 2021 at 6:12pm

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by सालिक गणवीर on February 6, 2021 at 2:02pm

आदरणीय  अमीरुद्दीन 'अमीर' जी
आदाब

अच्छी ग़ज़ल कही है आपने ,मुबारकबाद क़ुबूल करें. मुहतरम आपके मतले में "ए अम भी "की बंदिश है मगर कुछ अशआर में नदारद है ,ऐसा क्यों ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
yesterday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service