For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल (था नाम दिल पे नक़्श मिटाया नहीं गया)

221 2121 1221 212

था  नाम  दिल  पे   नक़्श  मिटाया  नहीं  गया
मुझसे   तुम्हारा    प्यार    भुलाया   नहीं  गया

कल  को   सँवारने   में    गई   बीत   ज़िन्दगी
जो  सामने  था   लुत्फ़    उठाया    नहीं  गया

कोशिश बहुत की, राज़-ए- मुहब्बत अयाँ न हो
अल्फ़ाज़    से   मगर   ये   छिपाया  नहीं  गया

बीवी  बहन  बहू   न     मिलेगी     कोई    तुम्हें
बेटी   को  कोख़   में   जो  बचाया   नहीं   गया

मंदिर  में  जाके  भोज  कराते  हो  किस   लिए
माँ  बाप  को  तो  तुमसे   खिलाया   नहीं  गया

पलको   से   रोकने  की   हुईं   कोशिशें    मगर
आसूँ  का  बोझ  दिल   से   उठाया   नहीं  गया

चहरे  को   रोज़   अपने    बदलता  रहूँ   जनाब
मुझको  हुनर   यही   तो   सिखाया   नहीं  गया

आती थीं  जिस  तरफ़  से  नज़र  ख़ूबियाँ  मेरी
क्यों उस तरफ़  से  मुझको   दिखाया  नहीं गया

मुश्किल  कहाँ  थे  वादे  मुहब्बत  के  'नाथ' पर
तुमसे    हमारा   साथ    निभाया    नहीं    गया

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 509

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on April 3, 2021 at 7:43pm

जनाब नाथ सोनांचली जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

कुछ टंकण त्रुटियाँ सुधार लें ।

Comment by Aazi Tamaam on March 31, 2021 at 5:48pm

खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई आदरणीय नाथ जी

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on March 30, 2021 at 8:10pm

जनाब नाथ सोनांचली जी आदाब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है, शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। आठवाँ शे'र और मक़्ता ख़ास पसंद आया है। कुछ टंकण त्रुटियों की ओर आपका ध्यानाकर्षण चाहता हूँ- 'कोख़' से नुक़्ता हटा लीजिए, 'पलको' को 'पलकों', 'आसूँ' को 'आँसू' कर लें।  सादर। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई अजय जी, अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
45 minutes ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"शानदार ग़ज़ल हुई। "
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इसे एक बार देख लें वो (जो) बुलाती रही उसे दिलबर भूख मारे उसी को भूल गया (भूख में वो उसी को भूल गया)"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"कुछ सुझावबाप ख़ुद की ख़ुशी को भूल गया आज बेटा उसी को भूल गया १ (शेर को अभी और स्पष्ट किया जा सकता…"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
" ‘अम्न का ख़्वाब रात में देखा’ में भी दोष है, यह शेर कुछ ऐसे हो सकता है।  अम्न…"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इसमें 'ही' गिराकर पढ़ा जायेगा। "
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अभिवादन गुणीजन कुछ सुधार किए हैं कृपया देखिएगा तू जुदा हो के जब उदास हुईमैं भी अपनी हँसी को भूल…"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजेय जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई आपकी बधाई स्वीकार कीजिए गिरह भी ख़ूब है चांदनी वाला…"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार ग़ज़ल का अच्छा प्रयास किया आपने बधाई स्वीकार कीजिए गुणीजनों की प्रतिक्रिया…"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय लक्ष्मण जी अभिवादन बहुत शुक्रिया आपका हौसला अफ़जाई के लिए  3शेर का सुझाव अच्छा दिया आपने…"
6 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"खूबसूरत ग़ज़ल हुई। इस पर विचार कर सकते हैं।पथ की हर रौशनी को भूल गया (राह की रौशनी को भूल गया) साथ…"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजेय जी नमस्कार बहुत बहुत शुक्रिया आपका , बेहतरी का प्रयास करूंगी सादर"
6 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service