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अन्तस में नर्तन करें, विगत रैन के द्वन्द ।
मुदित नैन रचने लगे, प्रीत गंध के छन्द । ।

नैनों से नैना करें , गुपचुप- गुपचुप बात ।
रैन तिमिर में हो गए, अलबेले उत्पात ।।

थोड़े से इंकार थे, थोड़े से इकरार ।
भली  लगी संघर्ष में, भोली भाली हार ।।

सुशील सरना / 20-7-21

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Sushil Sarna on August 6, 2021 at 2:10pm
आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम सर सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार सर । सर जिस त्रुटि की ओर आपने बताया है मैं भी शंकित था किन्तु जब शब्दकोश खंगाला तो द्वन्द्व और द्वन्द दोनों ही सही थे तो छन्द के तुकांत के रूप में मैंने द्वन्द को चुना । आपके मार्गदर्शन का दिल से आभार आदरणीय । आपका हर सुझाव मेरी इस यात्रा का अमूल्य मील का पत्थर है ।सादर नमन सर

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 31, 2021 at 11:45pm

आ० सुशील सरना जी, आपकी रचना-यात्रा वस्तुत: अभिभूत कर रही है. आपके छंद जिस ढंग से निरापद हैं, वह अत्यंत तोषदायी है. 

अलबत्ता, सुधार के जो बिंदु हैं, उनके प्रति सचेत करना, आपकी रचनात्मकता के प्रति सार्थक अनुमोदन होगा. 

आदरणीय, शुद्ध शब्द द्वंद्व है, न कि द्वंद.

ऐसे में तुकान्तता पर एक बार और एकाग्र होने की आवश्यकता है. 

बाकी, तीनों दोहों की महीनी रोचक तो है ही, आपकी रचनात्मकता के आयाम भी दर्शाती है. 

पुन:, वाह-वाह !! 

जय-जय 

Comment by Sushil Sarna on July 25, 2021 at 1:11pm
आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम ।सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 23, 2021 at 11:59pm

वाह .. आपकी छांदसिक यात्रा के प्रति साधुवाद 

शुभातिशुभ

Comment by Sushil Sarna on July 22, 2021 at 3:39pm
आदरणीय चेतन प्रकाश जी आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार । सर तीसरा दोहा एडिट से रह गया । अभी संशोधित करता हूँ सर । हार्दिक आभार सर ।
Comment by Sushil Sarna on July 22, 2021 at 3:37pm
आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब - सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा एवं सुझाव का दिल से आभारी है ।
Comment by Sushil Sarna on July 22, 2021 at 3:35pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार
Comment by Chetan Prakash on July 21, 2021 at 8:09pm

आदाब, सुशील सरना जी, प्रथम दोनों दोहे अच्छे  लगे ! किन्तु आदरणीय  त्रयी  का अन्तिम  दोहे का तीसरा  चरण, " अच्छी लगी  संघर्ष  में" दोष पूर्ण है, चौदह  मात्राएं  हैं, सादर !

Comment by Samar kabeer on July 21, 2021 at 3:20pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे कहे आपने, बधाई स्वीकार करें ।

'नैनों से नैना करे'--'करे' को "करें" कर लें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 21, 2021 at 1:08pm

आ. भाई सुशील जी, अच्छे दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।

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