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तन-मन के दोहे - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

तन-मन के दोहे
-------------------
चतुर लालची मन हुआ, भोली देह गँवार
जब तब जैसा मन कहे, होती वह तैयार।१।
*
सहज देह की भूख है, निदिया, रोटी, नीर
जग में पर बदनाम है, मन से अधिक शरीर।२।
*
तन को थोड़ा चाहिए, मन की माग अनंत
कहते मन बस में रखो, इस कारण ही सन्त।३।
*
बढ़े भावना काम की, करें नैन व्यभिचार
केवल साधन देह तो, मन साधक की मार।४।
*
तन से बढ़कर मन रहे, नित्य विषय में लीन
जिस की बातें मानकर, कर्म करे तन हीन।५।
*
विषय मुक्त जो मन रहे, चले न तन का जोर
नित्य विषय जग में करे, भीतर - बाहर शोर।६।
*
तन की केवल दो रहीं, मन की आँख अनेक
तभी झूठ सच छोड़कर, मन घुटने दे टेक।७।
*
मन में भरकर मत रखो, त्यागो विषय विकार
विषय मुक्त जीवन रहे, नित सुख का भण्डार।८।
*
गंगाजल में स्नान कर, गया न मन का पाप
विषय मुक्त है मन नहीं, भोगे तन अभिषाप।९।
*
तन से सब सन्यास लें, मन से लेता कौन
मन के पापों पर तभी, सब रहते हैं मौन।१०।

*

मौलिक.अप्रकाशित

लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 20, 2022 at 7:57pm

आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद। 

Comment by gumnaam pithoragarhi on May 19, 2022 at 4:32pm

वाह मुसाफिर जी वाह । शानदार दोहे हुए हैं । 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 15, 2022 at 10:42pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। दोहों की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 15, 2022 at 10:40pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति, उत्साहवर्धन और त्रुटि की ओर ध्यान दिलाने के लिए आभार।

Comment by Sushil Sarna on May 15, 2022 at 9:33pm
वाह आदरणीय जी लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर और सार्थक दोहावली है सर हार्दिक बधाई सर
Comment by Samar kabeer on May 9, 2022 at 7:45pm

जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब, अच्छे दोहे रचे आपने ,बधाई स्वीकार करें I 

'तन को थोड़ा चाहिए, मन की माग अनंत'--इस पंक्ति में टंकण त्रुटि देखें I 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 7, 2022 at 5:57am

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति, और स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद। आपको दोहे पसंद आये यह मेरे लिए हर्ष का विषय है। 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on May 6, 2022 at 10:00pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, तन और मन पर अच्छे दोहे रचे हैं आपने, 5वां, 8वां,9वां व 10वां दोहा के लिए ख़ास तौर पर बधाई स्वीकार करें।

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