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दूर मंजिल कब मिलेगी रास्ता कोई नहीं,
वो मुसाफिर हूँ कि जिसका रहनुमा कोई नहीं.

आशिकी में जो बने हैं आज मजनू  देखिये,
है अजब ये चीज उल्फत खुशनुमा कोई नहीं.

दोस्ती से दिल मिला लो सामने है आइना,
दुश्मनी को दूर रक्खो है मज़ा कोई नहीं .

वो जो आये हैं यहाँ पर खिल गया है दिल मेरा,
आज सारे सुर लगे हैं बेसुरा कोई नहीं.

चाँदनी के बीच चंचल चाँद सा चेहरा लगे,
घर वो लाये जान पाये बावफा कोई नहीं.

आज किस्मत को सँवारे आज ही है कीमती, 
आज तो बस आज ही है आज सा कोई नहीं.

आज 'अम्बर' आसमां है वो लगे धरती मेरी,
प्यार से ही प्यार उपजे दूसरा कोई नहीं.


--अम्बरीष श्रीवास्तव

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Comment by Veerendra Jain on July 28, 2011 at 11:56pm

चाँदनी के बीच चंचल चाँद सा चेहरा लगे,
घर वो लाये जान पाये बावफा कोई नहीं.

 

bahut hi behtarin...badhai ..Ambarish ji...

Comment by राज लाली बटाला on July 28, 2011 at 9:11pm

आज किस्मत को सँवारे आज ही है कीमती, 
आज तो बस आज ही है आज सा कोई नहीं. !! khoob!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 28, 2011 at 7:14pm

अर्थ पाती भावना है,  बेमजा  कोई  नहीं.  ............  

बहुत-बहुत बधाई.

Comment by sangeeta swarup on July 28, 2011 at 3:34pm

वो जो आये हैं यहाँ पर खिल गया है दिल मेरा, 
आज सारे सुर लगे हैं बेसुरा कोई नहीं. 

मन प्रसन्न हो तो सब अच्छा ही लगता है ..बहुत खूबसूरत गज़ल ... 

 

सब्जियों पर भी अशआर गज़ब का लिखा है 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 28, 2011 at 10:38am

धन्यवाद भाई बागी जी ! आपके सुझाव अनमोल हैं ........आपका हृदय से आभार मित्रवर ...........:-)

आपको एक शेर समर्पित कर रहा हूँ......

हैं हरी चम-चम चमकतीं चाँद सा चेहरा लगे,
घर जो लाये जान पाये  ज़ायका कोई नहीं.        अर्थात सब्जियाँ .......जय हो !!!!!..........हा हा हा हा हा हा ..............:-)

 

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 28, 2011 at 10:36am


वसुधा जी! आपका स्वागत है ! गज़ल की तारीफ के लिए तहे दिल से आपका शुक्रिया !

Comment by Vasudha Nigam on July 28, 2011 at 9:31am
आज किस्मत को सँवारे आज ही है कीमती,
आज तो बस आज ही है आज सा कोई नहीं.
बहुत ही खूबसूरत रचना हैं अंबरीश जी....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 28, 2011 at 9:24am

अम्बरीश भाई, बहुत ही सुंदर ग़ज़ल आपने प्रस्तुत किया है, आ की मात्रा को काफिया बना बहुत ही खुबसूरत शे'र कहे है, बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल हेतु |

कृपया ध्यान दे...

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