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कुछ न कुछ

मेरे शे-रों में कुछ न कुछ तो ज़रूर रहा होगा
वर्ना अश्क आपके,इस कदर न छलकते
अंधेरों में ही सही,चिराग जलाने चले आते हो
वर्ना मेरी मजार के आसपास,इस कदर बेबस न भटकते
मायूस होकर ना देखते,बंद फाइलों में तस्वीरें मेरी
मेरी यादों के लिए,इस कदर ना तरसते
यह तो 'दीपक कुल्लुवी' का वादा था याद रखेंगे
आप तो बेवफा थे,इस कदर बेवजह ना बदलते

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
०९१३६२११४८६
१५/०९/२०१०

Views: 281

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on September 16, 2010 at 9:27am
बहुत खूब ...सुन्दर नज़्म
मायूस होकर ना देखते,बंद फाइलों में तस्वीरें मेरी
मेरी यादों के लिए,इस कदर ना तरसते
ये पंक्तियाँ बड़ी खूबसूरत बन पड़ी है|

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 16, 2010 at 9:03am
बढ़िया है दीपक साहब, ख्याल अच्छे है, रुचिकर लगा ,
Comment by आशीष यादव on September 15, 2010 at 11:57pm
waah kulluwi ji,
aapne ek hi baar me wafa aur jafa dono ki baat kar di. bahut hi badhiya.
अंधेरों में ही सही,चिराग जलाने चले आते हो
वर्ना मेरी मजार के आसपास,इस कदर बेबस न भटकते. yah wafa ki baat hai, aur
यह तो 'दीपक कुल्लुवी' का वादा था याद रखेंगे
आप तो बेवफा थे,इस कदर बेवजह ना बदलते, isme kuchh bewafaai jhalak rahi hai.

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