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दीनो धरम,ईमान के हाइल हैं यहाँ पर|
मैं इल्म किसे दूँ,सभी जाहिल हैं यहाँ पर|

.
नादान बशर रो रहा जिस शख्स के आगे,
वह शख्स कहीं और है,गाफिल है यहाँ पर

.

मैं अपना सारा जोर अमल में हूँ ला रहा,
कुछ बात है जो सिफ़र ही हासिल है यहाँ पर|

.
साकी उसूल तेरा तिजारत है मयकदा,
मयख्वार मेरे वास्ते कामिल हैं यहाँ पर|

.
आतिश है,कफस,आशियां है,बाग है,बुलबुल,
सब एक दूसरे के मुक़ाबिल है यहाँ पर|

.
अंदर से टूटे लोगों की जमात है दुनिया|
बस कहने के ही वास्ते महफ़िल है यहाँ पर|

.
तू डर रहा मयंक क्यों पैगामे अजल से,
जल्लाद है आलम,सभी कातिल हैं यहाँ पर|

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Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 3, 2012 at 12:43pm

लाजवाब ग़ज़ल मनोज भाई!! नीचे आदरणीय योगराज जी ने इतना कुछ कह दिया है कि मेरे लिए कुछ बचा ही नहीं| तो ख़ाकसार की ओर से बधाई ही क़ुबूल कर लें| :)))

Comment by अश्विनी कुमार on April 3, 2012 at 12:38pm

वाह वाह वाह तू डर रहा मयंक क्यों पैगामे अजल से,
जल्लाद है आलम,सभी कातिल हैं यहाँ पर| .............बेहतरीन उम्दा .......जय भारत


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on April 3, 2012 at 11:56am

///दीनो धरम,ईमान के हाइल हैं यहाँ पर|
मैं इल्म किसे दूँ,सभी जाहिल हैं यहाँ पर|//

बेहतरीन मतला - उम्दा ख्याल. वाह वाह वाह. .

.

.//नादान बशर रो रहा जिस शख्स के आगे,
वह शख्स कहीं और है,गाफिल है यहाँ पर//

क्या कहने हैं मयंक साहिब, बहुत खूब.

.

//मैं अपना सारा जोर अमल में हूँ ला रहा,
कुछ बात है जो सिफ़र ही हासिल है यहाँ पर|/

यह शेअर आपकी लगन और संघर्ष की कहानी बयान कर रहा  है. बहुत सुंदर. 

.
//साकी उसूल तेरा तिजारत है मयकदा,
मयख्वार मेरे वास्ते कामिल हैं यहाँ पर|//

वाह  वाह वाह, रिवायती रंगत का यह शेअर भी बढ़िया कहा है आदरणीय मयंक जी. .

.

//आतिश है,कफस,आशियां है,बाग है,बुलबुल,
सब एक दूसरे के मुक़ाबिल है यहाँ पर|//

वाह मयंक साहिब वाह क्या तेवर हैं ऊला में - कमाल !! हासिल-ए-ग़ज़ल शेअर.

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//अंदर से टूटे लोगों की जमात है दुनिया|

बस कहने के ही वास्ते महफ़िल है यहाँ पर|//
वाह वाह वाह वाह - हकीकत बयान कर दी इस शेअर में - बहुत खूब  .

.
//तू डर रहा मयंक क्यों// पैगामे अजल से,
जल्लाद है आलम,सभी कातिल हैं यहाँ पर|/ /

मक्ता भी बहुत ही सुंदर कहा है. इन खूबसूरत आशार के लिए मेरी दिली मुबारकबाद कबूल फरमाएं आदरणीय मयंक साहिब.

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 3, 2012 at 7:38am

बहुत ही अच्छी रचना मनोज भाई! बधाई

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