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 अहसास

श्वेत वसन में लिपटा जीवन

जन गण का सम्मान लिए !

चूसें रक्त सदा वे विचरें

कानून न उन पर हाथ धरे !!

 

भले दीखते ऊपर ही चंगे

जब मन को साफ रखे ना !

सजे सजाये फिर भी नंगे

घर पर साँप को माफ़ करे न !! 

 

तिलक लगाये मिश्री घोलें

कामुक छुप आघात  करें !

विनय न मानें हठ ही जानें

चाबुक पर ही नाच करें !!

 

ह्रदय समाये पर निंदा

शिशु, नारी का अपमान करें !

घर फोड़े लहू की होली खेलें

भिक्षु अनाथ पे वार करें !!

 

उपहास करें चिथड़ों में देखें !

इतिहास कहे मरू में वे तडपें  !!

 

अहसास करें -ईश ईश तब आह भरें !

मति ह्रास -कटे पर- अपने भी दें छोड़ उन्हें !!

 

भ्रमर कहें बंधुत्व शांति पर पीड़ा का जो ध्यान रखें !

भूकंप न छेड़े -धरती न फटे -तूफान भी कश्ती पार  करे !!

 

मन प्राण खिले अमरत्व मिले ईहा लिप्सा जब त्याग करें !

उन्मुक्त फिरें बिगड़ी भी बने मुस्कान ही तृप्ति -प्यार मिले !!

भ्रमर5

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 18, 2012 at 11:48pm

आदरणीय दीपक शर्मा कुल्लवी जी आप इस देव नगरी कुल्लू से हैं मित्र के रूप में पा और प्रोत्साहन पा बड़ी ख़ुशी हुयी यों तो हम तो ठहरे परदेसी लेकिन आप की वादियों में हैं इस लिए आप के ही हैं अभी और मित्र हैं तो सदा के लिए जय श्री राधे 

भ्रमर ५ 
Comment by Deepak Sharma Kuluvi on July 18, 2012 at 5:21pm

wonderful...rachnayen sir

deepak sharma kuluvi

09350078399

Comment by Abhinav Arun on April 11, 2012 at 8:42am

सोचने को विवश करती रचना हार्दिक  बधाई और शुभकामनाएं श्री सुरेन्द्र जी !!

Comment by अश्विनी कुमार on April 11, 2012 at 8:29am

स्नेही भ्रमर जी ,,अति उच्च भाव युक्त प्रवाहमयी रचना के लिए आपका हार्दिक आभार .....

Comment by minu jha on April 8, 2012 at 6:21pm

भावों को खूबसूरती से पिरोया है आपने भ्रमर जी

Comment by anamika ghatak on April 7, 2012 at 4:13pm

बहुत ही बढ़िया भाव 

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 7, 2012 at 3:30pm

बहुत सुन्दर कविता,आदरणीय भ्रमर जी.

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 7, 2012 at 2:03pm

संवेदनशील रचना के लिए हार्दिक बधाई भ्रमर जी! स्वागतम आपका मंच पर|

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 7, 2012 at 7:44am

भ्रमर कहें बंधुत्व शांति पर पीड़ा का जो ध्यान रखें !

भूकंप न छेड़े -धरती न फटे -तूफान भी कश्ती पार  करे !!

आदरणीय भ्रमर जी, सादर , अपने भावों को आप जिस प्रकार रचते हैं. काबिले तारीफ होता है. बधाई!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 6, 2012 at 11:53pm

आदरणीय भ्रमर जी, सादर , अपने भावों को आप जिस प्रकार रचते हैं. काबिले तारीफ होता है. बधाई. 

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